IDBI Bank Privatization: सरकार ने 60.72% हिस्सेदारी बेचने को दी मंजूरी, ₹52,878 करोड़ में फेयरफैक्स खरीदेगी बैंक का बड़ा हिस्सा
IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने कनाडा की निवेशक कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स कनाडा इंक को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी है। प्रस्तावित सौदे का कुल मूल्य 52,878.08 करोड़ रुपये बताया गया है।
इस सौदे में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेची जाएगी। सरकार IDBI बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी, जबकि LIC अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी। सौदा पूरा होने के बाद दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रह जाएगी। सरकार के इस फैसले से बैंक के स्वामित्व और प्रबंधन में बड़े बदलाव का रास्ता खुला है। हालांकि, इस निर्णय का यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने विरोध किया है और इसके खिलाफ 16 अक्टूबर 2026 को ब्लैक बैज पहनकर प्रदर्शन करने की अपील की है।
IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने का पूरा गणित
प्रस्तावित सौदे के तहत IDBI बैंक की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी रणनीतिक खरीदार को बेची जाएगी। इसमें केंद्र सरकार के पास मौजूद 30.48 प्रतिशत और LIC के पास मौजूद 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। इस बिक्री के बाद केंद्र सरकार के पास बैंक की 15 प्रतिशत और LIC के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी।
इस प्रकार, सौदा पूरा होने के बाद दोनों संस्थाओं के पास बैंक की कुल 34 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह सौदा भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेशों में से एक होगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस सौदे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके पूरा होने पर यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।
₹52,878 करोड़ में होगा प्रस्तावित सौदा

IDBI बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर प्रस्तावों की जांच की गई। इसमें अंतर-मंत्रालयी समूह, विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह और कैबिनेट मंत्रियों का अधिकार प्राप्त समूह शामिल थे।
सरकार ने 7 अक्टूबर 2022 को प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी कर इस प्रक्रिया की शुरुआत की थी। इच्छुक बोलीदाताओं के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फिट एंड प्रॉपर मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत मंजूरी लेना और गृह मंत्रालय से सुरक्षा संबंधी स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक था।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राप्त शुरुआती बोलियां 94.42 रुपये प्रति शेयर के निर्धारित आरक्षित मूल्य से कम थीं। इसलिए उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2027 में योग्य बोलीदाताओं से दोबारा सीलबंद बोलियां आमंत्रित की गईं। इस प्रक्रिया में फेयरफैक्स की इकाई ने सफल बोली लगाई।
मूल्यांकन के बाद फेयरफैक्स की बोली को मंजूरी

बैंक की हिस्सेदारी बिक्री के लिए दो स्वतंत्र पेशेवर मूल्यांकन एजेंसियों ने अलग-अलग तरीकों से IDBI बैंक का मूल्यांकन किया। इन एजेंसियों के आकलन के आधार पर प्रति शेयर औसत उचित मूल्य 75.99 रुपये निर्धारित किया गया, जिसे बोलियों के मूल्यांकन का आधार बनाया गया।
प्रेस नोट के अनुसार, फेयरफैक्स की ओर से 81 रुपये प्रति शेयर की सफल बोली लगाई गई। यह कीमत औसत उचित मूल्यांकन और दोनों एजेंसियों के मूल्य अनुमानों से अधिक थी। इसी आधार पर बोली को उचित माना गया और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने इसे मंजूरी प्रदान की।
सौदे को अंतिम रूप देने से पहले सफल बोलीदाता को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही RBI की नियामकीय शर्तों का पालन करने के लिए एक रोडमैप भी देना होगा। सरकार की शेष 15 प्रतिशत हिस्सेदारी को खुले बाजार के माध्यम से बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अधिकार प्राप्त निर्णय लेने वाले तंत्र को सौंपी गई है। वहीं, LIC अपनी बची हुई हिस्सेदारी का प्रबंधन अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार करेगी।
बैंक यूनियनों ने निजीकरण और विदेशी निवेश का किया विरोध

IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने के फैसले पर बैंक कर्मचारी संगठनों ने आपत्ति जताई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 15 अक्टूबर 2026 को जारी अपने सर्कुलर में सरकार के निर्णय का विरोध किया। संगठन का कहना है कि सरकार निजीकरण के एजेंडे के तहत बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। यूनियंस ने इसे केवल निजीकरण नहीं, बल्कि विदेशीकरण का मामला भी बताया है।
संगठन ने अपने सर्कुलर में दावा किया कि IDBI बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और बैंक लगातार मुनाफा कमा रहा है। सर्कुलर के अनुसार, बैंक में सार्वजनिक जमा राशि लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये है। इसमें पिछले तीन वित्तीय वर्षों के शुद्ध मुनाफे का उल्लेख करते हुए क्रमशः 5,600 करोड़, 7,500 करोड़ और 9,500 करोड़ रुपये के आंकड़े दिए गए हैं।
यूनियंस ने यह भी कहा कि पहले सरकार ने संसद में बैंक में कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही थी। संगठन ने मौजूदा फैसले को वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही सभी संबद्ध यूनियनों और सदस्यों से 16 अक्टूबर 2026 को ब्लैक बैज पहनकर विरोध दर्ज कराने की अपील की गई है।
निष्कर्ष
IDBI बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी मिलने से बैंक के स्वामित्व में बड़े बदलाव की संभावना बढ़ गई है। 52,878.08 करोड़ रुपये के इस सौदे को पूरा करने के लिए RBI की नियामकीय प्रक्रिया और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। दूसरी ओर, बैंक यूनियनों के विरोध ने इस विनिवेश को लेकर कर्मचारी संगठनों की चिंताओं को सामने रखा है। अब सौदे की आगे की प्रक्रिया और उसके पूरा होने पर नजर रहेगी।
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