एशियन पैरा गेम्स: प्रवीण कुमार ने हाई जंप में जीता गोल्ड, बंटी को सिल्वर; शीतल देवी-पायल नाग की जोड़ी ने भी जीता रजत पदक
एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एथलेटिक्स और तीरंदाजी में देश को पदक दिलाए। नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में प्रवीण कुमार ने पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इसी स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी बंटी ने रजत पदक अपने नाम किया। इसके अलावा, महिलाओं की कंपाउंड डबल्स तीरंदाजी स्पर्धा में शीतल देवी और पायल नाग की भारतीय जोड़ी ने सिल्वर मेडल हासिल किया।
बुधवार को हुए मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। हाई जंप में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की ऊंचाई पार कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि बंटी 1.92 मीटर की छलांग के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, तीरंदाजी के फाइनल में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी को चीन की खिलाड़ियों से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इन मुकाबलों में भारत को दो रजत पदक और एक स्वर्ण पदक मिला। हालांकि, पुरुषों की तीरंदाजी डबल्स स्पर्धा में भारतीय जोड़ी मामूली अंतर से कांस्य पदक जीतने से चूक गई।
प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर बनाया रिकॉर्ड
पुरुषों की हाई जंप की T44/64 कैटेगरी में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की ऊंचाई पार करके गोल्ड मेडल जीता। उनके इस प्रदर्शन के साथ प्रतियोगिता में नया गेम्स रिकॉर्ड भी बना। इसी स्पर्धा में भारत के बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया और रजत पदक जीता।
उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी तैमूरबेक गियाजोव 1.86 मीटर की ऊंचाई पार करके तीसरे स्थान पर रहे। इस तरह हाई जंप स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और रजत दोनों पदक अपने नाम किए।
प्रवीण का प्रदर्शन इस स्पर्धा में भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। वहीं, बंटी ने भी 1.92 मीटर की ऊंचाई पार करके पदक तालिका में भारत का योगदान बढ़ाया। दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के दम पर प्रतियोगिता में शीर्ष दो स्थान हासिल किए।
क्या है T44 और T64 कैटेगरी का अंतर?
पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक स्थिति और खेल में आने वाली चुनौतियों के आधार पर अलग-अलग वर्गों में रखा जाता है। T44 और T64 कैटेगरी निचले अंगों से संबंधित विकलांगता वाले एथलीटों के लिए निर्धारित हैं। कुछ प्रतियोगिताओं में इन दोनों वर्गों के खिलाड़ी एक ही स्पर्धा में हिस्सा लेते हैं, ताकि पर्याप्त संख्या में प्रतियोगी उपलब्ध रहें और मुकाबला व्यवस्थित तरीके से कराया जा सके।
T64 कैटेगरी में ऐसे एथलीट शामिल होते हैं, जो निचले अंगों से संबंधित विकलांगता के कारण कृत्रिम अंगों यानी प्रोस्थेटिक का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, T44 कैटेगरी उन खिलाड़ियों के लिए है, जिनके निचले अंगों में विकलांगता होती है, लेकिन वे इस वर्गीकरण के अंतर्गत कृत्रिम अंगों का इस्तेमाल नहीं करते।
इन वर्गों का उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रतियोगिताओं का वर्गीकरण करना है। प्रवीण कुमार और बंटी ने T44/64 स्पर्धा में क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल कर भारत को दो पदक दिलाए।
शीतल देवी और पायल नाग ने कंपाउंड डबल्स में जीता सिल्वर
एशियन पैरा गेम्स की महिलाओं की कंपाउंड डबल्स तीरंदाजी स्पर्धा में शीतल देवी और पायल नाग की भारतीय जोड़ी ने रजत पदक जीता। फाइनल में उनका मुकाबला चीन की जू ज्यूकिंग और झाओ जिंग की जोड़ी से हुआ। चीनी खिलाड़ियों ने 150 अंक हासिल किए, जबकि भारतीय जोड़ी 141 अंक तक पहुंच सकी। इस तरह चीन ने स्वर्ण और भारत ने रजत पदक अपने नाम किया।
फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी को शुरुआत से ही कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। शीतल देवी ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए चार बार 10 अंक हासिल किए। हालांकि, पायल नाग अपेक्षित स्कोर नहीं बना सकीं। उनके आखिरी तीर पर 7 अंक आए, जबकि इससे पहले के प्रयासों में उन्होंने 9 और 8 अंक हासिल किए थे।
इस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर भारतीय जोड़ी को दूसरा स्थान मिला। हालांकि, टीम स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई, लेकिन रजत पदक के साथ उसने प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए एक और उपलब्धि दर्ज की।
शीतल देवी का लगातार दूसरा सिल्वर मेडल
शीतल देवी के लिए यह एशियन पैरा गेम्स की कंपाउंड डबल्स स्पर्धा में लगातार दूसरा रजत पदक है। पिछले एशियन पैरा गेम्स में भी उन्होंने सरिता देवी के साथ जोड़ी बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था। इस बार पायल नाग के साथ उनकी जोड़ी ने रजत पदक जीता।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोइधर गांव की रहने वालीं शीतल देवी का जन्म फोकोमेलिया नामक दुर्लभ जन्मजात स्थिति के कारण बिना हाथों के हुआ था। उनकी यह शारीरिक स्थिति उनके तीरंदाजी करियर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वह व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में भी पदक की दावेदार मानी जा रही हैं।
पायल नाग भी हाथों और पैरों से संबंधित विकलांगता के बावजूद पैरा तीरंदाजी में हिस्सा लेती हैं। दोनों खिलाड़ियों ने मिलकर कंपाउंड डबल्स के फाइनल तक का सफर तय किया और भारत के लिए रजत पदक हासिल किया। शीतल का लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा में रजत जीतना उनके पिछले प्रदर्शन की निरंतरता को भी दर्शाता है।
पुरुषों की तीरंदाजी जोड़ी मामूली अंतर से चूकी
महिलाओं की कंपाउंड डबल्स स्पर्धा में रजत पदक मिलने के बीच पुरुषों की डबल्स स्पर्धा में भारतीय जोड़ी कांस्य पदक हासिल नहीं कर सकी। टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी का मुकाबला चीन के ऐ शिनलियांग और झांग यिचेंग से हुआ।
दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। भारतीय जोड़ी ने 153 अंक हासिल किए, जबकि चीनी खिलाड़ियों ने 154 अंक बनाकर एक अंक के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम के कारण टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी कांस्य पदक जीतने से चूक गए।
इस तरह एशियन पैरा गेम्स में हाई जंप और तीरंदाजी की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल किए। पुरुषों की तीरंदाजी जोड़ी का मुकाबला भी कड़े संघर्ष के साथ समाप्त हुआ, लेकिन टीम पदक हासिल नहीं कर सकी।
निष्कर्ष
एशियन पैरा गेम्स में प्रवीण कुमार का स्वर्ण पदक और नया गेम्स रिकॉर्ड, बंटी का रजत पदक तथा शीतल देवी-पायल नाग की जोड़ी का सिल्वर मेडल भारत के लिए प्रमुख उपलब्धियां रहीं। वहीं, पुरुषों की तीरंदाजी जोड़ी केवल एक अंक के अंतर से कांस्य पदक से चूक गई। इन परिणामों के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स और पैरा तीरंदाजी में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।
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