BRICS 2026 पर दुनिया की नजर, मोदी-शी की कूटनीति के बीच बढ़ी अमेरिका की चिंता! क्या बदलेगा ग्लोबल पावर गेम?

12 Sep 2026 - 10:41
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BRICS 2026 पर दुनिया की नजर, मोदी-शी की कूटनीति के बीच बढ़ी अमेरिका की चिंता! क्या बदलेगा ग्लोबल पावर गेम?

भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 को लेकर दुनियाभर में चर्चा तेज है। नई दिल्ली में एक मंच पर चीन, रूस, ईरान समेत कई प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी ने इस सम्मेलन का महत्व और बढ़ा दिया है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच BRICS की बैठक को वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिकी मीडिया में भी सम्मेलन को लेकर खास दिलचस्पी दिखाई गई है। प्रमुख अखबारों के मुताबिक, इस बैठक में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकासशील देशों के बीच भारत और चीन में से कौन अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाता है।

BRICS में भारत-चीन की बढ़ती कूटनीतिक अहमियत

चीन BRICS को अमेरिकी प्रभाव के सामने एक मजबूत मंच के रूप में देखता है, जबकि भारत संगठन को ज्यादा खुला और व्यापक रखने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। युद्ध, ऊर्जा कीमतें, अमेरिकी टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दे भी BRICS देशों के बीच चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के लिए भारत की अमेरिका के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी चिंता का विषय है। यही वजह है कि बीजिंग भारत के साथ अपने संबंधों में सुधार की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहता।

सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को भी बेहद अहम माना जा रहा है। 2020 के सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि, 2024 के बाद दोनों पक्षों के बीच संबंधों में धीरे-धीरे सुधार की कोशिशें देखने को मिली हैं।

भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के बावजूद सीमा विवाद, पाकिस्तान के साथ चीन की नजदीकी और हिंद महासागर में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

ट्रंप-शी मुलाकात से पहले BRICS पर नजर

शी जिनपिंग की आगामी अमेरिकी यात्रा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी प्रस्तावित मुलाकात के बीच नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में भारत-चीन संबंधों में होने वाली किसी भी प्रगति पर अमेरिका की भी नजर रहना स्वाभाविक है।

यूक्रेन और मिडिल ईस्ट के मुद्दे बन सकते हैं चुनौती

BRICS के विस्तार के साथ संगठन में शामिल देशों के हित भी काफी अलग-अलग हैं। यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष इन मतभेदों को सामने ला सकते हैं। भारत के रूस और ईरान के साथ पुराने संबंध हैं, वहीं वह अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी अपनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है।

ऐसे में BRICS 2026 भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन साधने और ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका मजबूत करने का बड़ा कूटनीतिक अवसर माना जा रहा है।

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