महाराष्ट्र में FDA का बड़ा एक्शन: पुणे संभाग के 5 जिलों में छापेमारी, 1.29 करोड़ का खाद्य तेल जब्त

11 Oct 2026 - 13:27
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महाराष्ट्र में FDA का बड़ा एक्शन: पुणे संभाग के 5 जिलों में छापेमारी, 1.29 करोड़ का खाद्य तेल जब्त

त्योहारों के मौसम में उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य उत्पाद मुहैया कराने के उद्देश्य से महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की विशेष टीमों ने पुणे संभाग के विभिन्न जिलों में एक साथ छापेमारी कर मिलावटखोरी और नियमों की अनदेखी करने वाली इकाइयों पर नकेल कसी है। इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य बाजार में बिक रहे खाद्य तेल की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की पड़ताल करना है।

​शुक्रवार को चलाए गए इस विशेष जांच अभियान के दौरान एफडीए अधिकारियों ने पुणे संभाग के पांच प्रमुख जिलों—पुणे, सांगली, सोलापुर, सातारा और कोल्हापुर में 25 व्यापारिक प्रतिष्ठानों की गहन जांच की। इस दौरान विभाग ने सुरक्षा और पैकेजिंग मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर कुल 74,612 किलोग्राम खाद्य तेल जब्त किया। जब्त किए गए तेल की कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.29 करोड़ रुपये आंकी गई है।

​खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, जांच के दौरान उत्पादन, पैकेजिंग और वितरण से जुड़े कई गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। कई स्थानों पर तेल की गुणवत्ता, सुरक्षा नियमों, सही लेबलिंग और आवश्यक उत्पादन दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि जब्त किए गए सभी नमूनों को तुरंत जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला में भेज दिया गया है और लैब रिपोर्ट आने के बाद दोषी कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

​पुणे जिले में सबसे बड़ी कार्रवाई, 34 टन से अधिक तेल जब्त

​इस पूरे विशेष अभियान के तहत सबसे बड़ी और व्यापक कार्रवाई पुणे जिले में देखने को मिली। एफडीए की टीम ने जिले के कुल आठ अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर अचानक दबिश दी। इस दौरान अधिकारियों ने इन इकाइयों से 34,481 किलोग्राम संदिग्ध खाद्य तेल जब्त किया, जिसका बाजार मूल्य लगभग 58.90 लाख रुपये बताया जा रहा है।

​यह कार्रवाई जिले के कई औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में एक साथ की गई, जिनमें बारामती, चाकण, जुन्नर, मुलशी, पुणे शहर, गुलटेकड़ी और देहू जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में संचालित प्रसंस्करण और भंडारण इकाइयों में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों का खुलेआम उल्लंघन पाया गया।

​जांच में सामने आईं गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक खामियां

​छापेमारी के दौरान अधिकारियों को विनिर्माण और भंडारण प्रक्रियाओं में कई तकनीकी व प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिलीं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कई व्यावसायिक स्थलों पर स्थापित प्रयोगशालाएं निष् निष्क्रिय पाई गईं और वहां अनिवार्य केमिस्ट (रसायनशास्त्री) अनुपस्थित थे।

​इसके अलावा, स्वच्छता और सुरक्षा को दरकिनार करते हुए पुराने टिन का दोबारा उपयोग किया जा रहा था। इतना ही नहीं, खाद्य तेल के भंडारण टैंकों के लिए एक ही साझा पाइपलाइन प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे क्रॉस-कंटेमिनेशन (मिलावट या संदूषण) का खतरा बना रहता है। कई इकाइयों के पास स्टॉक रजिस्टर, बैचवार जांच रिपोर्ट और खरीद-बिक्री से संबंधित कोई वैध रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। चाकण स्थित एक इकाई में लाइसेंस के बावजूद तेल की कुछ विशिष्ट श्रेणियों का उल्लेख तक नहीं किया गया था।

​सोलापुर, कोल्हापुर, सातारा और सांगली में भी चला हंटर

​पुणे संभाग के अन्य चार जिलों में भी एफडीए की टीमों ने सख्त कदम उठाए। सोलापुर जिले में पांच प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर 13,490.4 किलोग्राम तेल जब्त किया गया, जिसकी कुल कीमत लगभग 25.33 लाख रुपये है। जांच में पाया गया कि सोलापुर में पैकेटों पर बैच नंबर, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और एक्सपायरी डेट संबंधी जानकारी में भारी गड़बड़ी थी।

​इसी तरह कोल्हापुर के चार प्रतिष्ठानों से लगभग 29.03 लाख रुपये मूल्य का 18,156 किलोग्राम तेल जब्त किया गया। सातारा में चार ठिकानों से 5,948.15 किलोग्राम तेल जब्त हुआ, जहां एक कारोबारी बिना वैध लाइसेंस के संचालन कर रहा था और पुराने टिनों में तेल भर रहा था। वहीं सांगली जिले के चार प्रतिष्ठानों से 2,536.46 किलोग्राम खाद्य तेल जब्त कर नमूनों को जांच के लिए भेजा गया।

​लैब रिपोर्ट के आधार पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

​खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे अभियान का मूल उद्देश्य त्योहारी सीजन में आम नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना है। मिलावटी या घटिया स्तर का तेल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है, इसलिए सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

​विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब्त किए गए खाद्य तेल के सभी सैंपलों की विस्तृत रासायनिक जांच कराई जा रही है। प्रयोगशाला से अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिन कारोबारियों के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी एफआईआर और विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

​निष्कर्ष

​त्योहारों के आगमन के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है। महाराष्ट्र एफडीए द्वारा पुणे संभाग के पांचों जिलों में की गई यह बड़ी कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा नियमों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर होने वाली कानूनी कार्रवाई से बाजार में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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