गौरव गोगोई के ‘जेल’ वाले बयान पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार, बोले- चुनाव में मुद्दों और जनता के वोट की बात हो

04 Oct 2026 - 11:36
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गौरव गोगोई के ‘जेल’ वाले बयान पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार, बोले- चुनाव में मुद्दों और जनता के वोट की बात हो

असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को लेकर दिए गए ‘जेल’ संबंधी बयान पर सरमा ने पलटवार किया है। गोगोई ने दावा किया था कि अगर राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ मामला दर्ज होगा और उन्हें जेल भेजा जाएगा।

गोगोई के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के समय और अगले लोकसभा चुनाव का हवाला दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है, तो अभी से राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की बात किस आधार पर की जा रही है। सरमा ने कांग्रेस से इस ‘चमत्कार’ का फॉर्मूला जानने की बात भी कही।

सरमा ने यह भी कहा कि चुनावी राजनीति में जेल की चर्चा के बजाय मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर बात होनी चाहिए। उन्होंने चुनाव को जनता के वोट और उसके मुद्दों से जोड़ते हुए कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा।

2029 के लोकसभा चुनाव का सरमा ने दिया हवाला

गौरव गोगोई के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने पूछा कि राहुल गांधी अभी प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं, जबकि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है। उन्होंने चुनाव के समय को लेकर कांग्रेस के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभी से प्रधानमंत्री बनने और उसके बाद कार्रवाई की बात करना उनके लिए समझ से परे है।

सरमा ने इस बयान पर तंज कसते हुए कांग्रेस से यह जानने की इच्छा जताई कि आखिर ऐसा कौन सा तरीका है, जिससे राहुल गांधी निर्धारित चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं। उनके इस बयान को गोगोई के दावे के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

‘चुनाव में जेल नहीं, वोट की बात हो’

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि जब चुनाव का समय आता है, तो गौरव गोगोई और राहुल गांधी की ओर से उनके जेल जाने की बातें की जाती हैं। उन्होंने इस तरह की बयानबाजी के बजाय मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को चुनावी चर्चा का केंद्र बनाने की बात कही।

सरमा ने कहा कि चुनाव का फैसला जेल में बंद लोगों से नहीं, बल्कि आम जनता के वोट से होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जेल में बंद कैदी वोट नहीं देते। आम जनता वोट देती है।”

मुख्यमंत्री ने चुनावी चर्चा में सड़क, स्कूल, कॉलेज और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं जैसे जनता से जुड़े मुद्दों पर बात करने की अपील की। उनके मुताबिक चुनाव में मतदाताओं के सामने उनके रोजमर्रा से जुड़े विषय प्रमुख होने चाहिए।

गौरव गोगोई ने क्या कहा था?

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 2 अक्टूबर को एक चुनावी सभा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को लेकर बयान दिया था। उन्होंने दावा किया कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो सरमा के खिलाफ अगले ही दिन मामला दर्ज किया जाएगा और इसके बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा।

गोगोई का यह बयान सामने आने के बाद असम के मुख्यमंत्री ने इसका जवाब दिया। दोनों नेताओं के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय हुई है, जब असम की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

गौरव गोगोई ने अपने बयान में मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दावा किया, जबकि सरमा ने जवाब में चुनाव और मतदाताओं के मुद्दों को केंद्र में रखने की बात कही।

विकास के मुद्दों पर चर्चा की अपील

हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी प्रतिक्रिया में चुनावी बहस को विकास और जनहित के विषयों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सड़कों, स्कूलों, कॉलेजों और कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी मुद्दे उठाए जा रहे हैं। ऐसे में गोगोई और सरमा के बीच सामने आए ताजा बयान असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक खींचतान को दर्शाते हैं।

इससे पहले भी दोनों पक्षों के बीच मुख्यमंत्री को लेकर जेल और कानूनी कार्रवाई से जुड़े बयान सामने आते रहे हैं। जुलाई 2025 में राहुल गांधी ने भी असम में एक कार्यक्रम के दौरान सरमा को जेल भेजे जाने की बात कही थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी थी।

असम की राजनीति में बयानबाजी फिर तेज

गौरव गोगोई के ताजा बयान और हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया के बाद असम में राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को लेकर राजनीतिक व कानूनी सवाल उठा रही है, वहीं मुख्यमंत्री सरमा चुनावी चर्चा को जनता से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित करने की बात कर रहे हैं।

दोनों पक्षों के बयानों को उनके संबंधित राजनीतिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल इस पूरे विवाद का केंद्र गोगोई का मुख्यमंत्री को लेकर ‘जेल’ वाला दावा और उसके जवाब में सरमा की चुनाव, वोट तथा जनहित के मुद्दों पर की गई टिप्पणी है।

निष्कर्ष

असम में गौरव गोगोई के बयान के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के पलटवार से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई है। सरमा ने 2029 के लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के दावे पर सवाल उठाया और कहा कि चुनावी चर्चा जेल के बजाय जनता के मुद्दों और वोट पर केंद्रित होनी चाहिए। वहीं, गोगोई का मूल बयान मुख्यमंत्री के खिलाफ भविष्य में कानूनी कार्रवाई के दावे पर आधारित था।

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