UCC पर NDA में बढ़ी हलचल! अमित शाह के बयान के बाद चिराग पासवान ने साफ किया अपना रुख
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले बीजेपी-एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब एनडीए के सहयोगी दलों की अलग-अलग राय सामने आने लगी है। बिहार में जेडीयू के विरोध के बाद केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी यूसीसी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी समानता के साथ-साथ देश की विविधता को भी महत्वपूर्ण मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद ही उनकी पार्टी इस पर अपना विस्तृत पक्ष रखेगी। उनका कहना है कि कानून तैयार करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
भारत की विविधता का भी रखा ध्यान
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना बेहद विविध है और अलग-अलग समुदायों की अपनी परंपराएं व रीति-रिवाज हैं। उन्होंने संविधान में अनुसूचित जनजातियों और कुछ विशेष क्षेत्रों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता, दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है।
जेडीयू ने भी जताया विरोध
अमित शाह के बयान के बाद बिहार में एनडीए के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। जेडीयू नेता श्याम रजक ने कहा कि पार्टी पहले ही यूसीसी को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। उनके मुताबिक जेडीयू संसद में यूसीसी विधेयक का समर्थन कर सकती है, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है।
अमित शाह ने क्या कहा था?
मुंबई में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा था कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकारें 2029 से पहले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। उन्होंने तीन तलाक खत्म किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में उठाया गया कदम बताया। गृह मंत्री के इस बयान के बाद अब यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होती दिखाई दे रही है।
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