सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, 8.5 लाख किताबों वाली 135 साल पुरानी लाइब्रेरी के भविष्य पर सुनवाई

04 Oct 2026 - 10:32
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सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, 8.5 लाख किताबों वाली 135 साल पुरानी लाइब्रेरी के भविष्य पर सुनवाई

दिल्ली की 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक किताबें और दस्तावेज मौजूद हैं। मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के बीच शास्त्री भवन से लाइब्रेरी को स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ करेगी। कोर्ट का यह कदम लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त और उपयुक्त जगह को लेकर उठे सवालों के बीच आया है। इस मामले को लेकर 3 अक्टूबर 2026 को स्वत: संज्ञान कार्यवाही दर्ज की गई थी।

हालांकि, इस बीच आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने स्पष्ट किया है कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए जगह का प्रावधान किया गया है और इसके निर्माण की आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्ट्स के बाद दिया, जिनमें लाइब्रेरी के लिए नई योजना में जगह नहीं होने की बात कही गई थी।

1891 में हुई थी लाइब्रेरी की शुरुआत

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी भारत सरकार की सबसे पुरानी लाइब्रेरियों में शामिल है और यह संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1891 में कोलकाता में इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के रूप में हुई थी।

भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद लाइब्रेरी को भी दिल्ली लाया गया। इसके बाद अलग-अलग स्थानों से होते हुए वर्ष 1969 में इसे शास्त्री भवन के G-Wing में स्थापित किया गया, जहां यह वर्तमान में संचालित है।

लाइब्रेरी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इसके संग्रह में करीब 8.5 लाख प्रिंटेड और नॉन-प्रिंटेड दस्तावेज हैं। संग्रह के आकार के लिहाज से यह नेशनल लाइब्रेरी, कोलकाता के बाद केंद्र सरकार की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है।

8.5 लाख से ज्यादा किताबों और दस्तावेजों का संग्रह

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी में सामान्य पुस्तकों के साथ दुर्लभ किताबें, सरकारी प्रकाशन, रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मौजूद हैं। यह संग्रह सरकारी कामकाज, शोध और भारत तथा भारतीय राज्यों के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास से संबंधित अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता है।

लाइब्रेरी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इसके संसाधनों को अलग-अलग वर्गों में व्यवस्थित किया गया है। मुख्य रीडिंग क्षेत्र में विश्वकोश, शब्दकोश, हैंडबुक और ईयरबुक जैसी संदर्भ सामग्री भी उपलब्ध है।

CSL की एक टेक्स्टबुक लाइब्रेरी नई दिल्ली के आर.के. पुरम में भी मौजूद है। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, लाइब्रेरी का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ अध्ययन और शोध से जुड़े लोगों को उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराना है।

नई जगह को लेकर सामने आया 300 वर्ग मीटर का प्रस्ताव

लाइब्रेरी को शास्त्री भवन से स्थानांतरित करने को लेकर केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच जगह की जरूरत को लेकर मतभेद सामने आए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जनवरी 2026 में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन संपदा निदेशालय ने कर्तव्य भवन-2 के ग्राउंड फ्लोर पर करीब 300 वर्ग मीटर में दो कमरे लाइब्रेरी के लिए आवंटित किए थे।

संस्कृति मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि इतनी जगह में लाइब्रेरी के पूरे संग्रह और जरूरी सुविधाओं को समायोजित करना संभव नहीं होगा। बाद में मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया कि उपलब्ध जगह में पूरे संग्रह और सुविधाओं के साथ लाइब्रेरी को स्थानांतरित करना संभव नहीं है।

यही मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान का प्रमुख हिस्सा बना है। कोर्ट के सामने यह सवाल भी रहेगा कि इतने बड़े ऐतिहासिक संग्रह को नई जगह पर किस तरह व्यवस्थित किया जाएगा।

शास्त्री भवन से स्थानांतरण के बीच बढ़ी चिंता

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत शास्त्री भवन से मंत्रालयों और कार्यालयों को नई इमारतों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी वजह से CSL के मौजूदा परिसर से हटाए जाने को लेकर उसके भविष्य पर सवाल उठे।

रिपोर्टों के अनुसार, लाइब्रेरी चार मंजिलों में फैली है और इसका मौजूदा परिसर करीब 5,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में बताया गया है। ऐसे में 8.5 लाख से ज्यादा किताबों और दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त जगह और सुविधाओं की जरूरत है।

हालांकि, अब आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने कहा है कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में जगह का प्रावधान किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, नई लाइब्रेरी के निर्माण की आवश्यक प्रक्रिया चल रही है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी से जुड़े इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ के सामने होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान ऐसे समय लिया है, जब लाइब्रेरी के नए परिसर और वहां मौजूद विशाल संग्रह को लेकर सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

अब सुनवाई में लाइब्रेरी के स्थानांतरण, उपलब्ध कराई जाने वाली जगह और उसके ऐतिहासिक संग्रह के लिए जरूरी व्यवस्थाओं से जुड़े पहलुओं पर ध्यान जा सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि लाइब्रेरी के लिए जगह का प्रावधान किया गया है और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

निष्कर्ष

135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी अपने 8.5 लाख से अधिक किताबों और दस्तावेजों के कारण भारत के महत्वपूर्ण सरकारी पुस्तकालयों में शामिल है। शास्त्री भवन से इसके स्थानांतरण को लेकर पर्याप्त जगह और सुविधाओं का मुद्दा सामने आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। वहीं, सरकार ने नई योजना में लाइब्रेरी के लिए जगह उपलब्ध होने और निर्माण प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी है। ऐसे में सोमवार की सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

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