कर्जत-भीमाशंकर में 600 एकड़ जंगल पर संकट? हाइड्रोपावर परियोजना के लिए 32 हजार से अधिक पेड़ काटने का प्रस्ताव

26 Oct 2026 - 13:35
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कर्जत-भीमाशंकर में 600 एकड़ जंगल पर संकट? हाइड्रोपावर परियोजना के लिए 32 हजार से अधिक पेड़ काटने का प्रस्ताव

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत-भीमाशंकर क्षेत्र में प्रस्तावित पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर परियोजना को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ गई हैं। टोरेंट पावर कंपनी की इस परियोजना के लिए लगभग 600 एकड़ वन क्षेत्र में 32,000 से अधिक पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है। पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताते हुए पेड़ों की कटाई रोकने और परियोजना के संभावित प्रभावों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

यह परियोजना कर्जत तालुका की सैडोंगर-पेज नदी घाटी में प्रस्तावित है। इसकी क्षमता 3,000 मेगावाट बताई गई है और अनुमानित लागत लगभग 13,500 से 15,000 करोड़ रुपये के बीच है। भीमाशंकर अभयारण्य के नजदीक स्थित इस क्षेत्र की जैव विविधता और जलस्रोतों को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

पर्यावरण याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का असर जंगल, वन्यजीवों, पहाड़ी ढलानों और स्थानीय आदिवासी समुदायों पर पड़ सकता है। इसी वजह से परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों और उससे जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है।

600 एकड़ वन क्षेत्र में पेड़ कटाई का प्रस्ताव

टोरेंट पावर कंपनी की प्रस्तावित पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर परियोजना के लिए लगभग 600 एकड़ जंगल में 32,000 से अधिक पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव है। परियोजना की 3,000 मेगावाट क्षमता और बड़े क्षेत्र में संभावित निर्माण गतिविधियों को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इसके प्रभावों पर सवाल उठाए हैं।

यह वन क्षेत्र भीमाशंकर अभयारण्य के आसपास स्थित है, जहां जैव विविधता को लेकर विशेष चिंता जताई जा रही है। विरोध करने वालों का मानना है कि जंगल के बड़े हिस्से में पेड़ों की कटाई से प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, परियोजना के वास्तविक पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन विस्तृत अध्ययन के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

पर्यावरण संगठनों और ग्रामीणों ने जताया विरोध

इस प्रस्ताव के विरोध में उल्हास नदी बचाओ कृति समिति , शहीद दिलीप कपोटे फाउंडेशन और स्थानीय ग्रामीण सामने आए हैं। उनका कहना है कि वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से प्राकृतिक संसाधनों और आसपास रहने वाले समुदायों पर असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता जंगल, वन्यजीवों और पानी के स्रोतों को लेकर है। उनके अनुसार, क्षेत्र में किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय परिस्थितियों का समुचित आकलन किया जाना चाहिए। इस मामले में पेड़ों की कटाई को लेकर आपत्तियां परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों की समीक्षा की मांग को प्रमुखता से सामने लाती हैं।

NGT से पेड़ कटाई रोकने की मांग

पर्यावरणविदों और याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तथा पर्यावरण विभाग से प्रस्तावित पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनकी मांग है कि भीमाशंकर के आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्र में आगे की कार्रवाई से पहले परियोजना के संभावित प्रभावों की जांच की जाए।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि परियोजना से संबंधित वन्यजीव प्रभाव अध्ययन, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए। इससे स्थानीय समुदायों और संबंधित पक्षों को परियोजना के संभावित प्रभावों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इन मांगों का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया में पर्यावरणीय पहलुओं और स्थानीय हितों को ध्यान में रखना है।

पेज नदी और उल्हास नदी के जलस्रोतों पर चिंता

इस परियोजना को लेकर एक प्रमुख चिंता नदी घाटी और जलस्रोतों पर संभावित प्रभाव की है। पेज नदी, उल्हास नदी को पानी उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण नदी बताई गई है। उल्हास नदी से सात महानगरीय नगरपालिकाओं के एक करोड़ से अधिक लोगों की पानी की जरूरतें पूरी होती हैं।

ऐसे में पर्यावरण याचिकाकर्ताओं ने जलस्रोतों पर संभावित प्रभावों का आकलन करने की मांग की है। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई और पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों के कारण पानी की उपलब्धता तथा प्राकृतिक ढलानों की स्थिरता पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जाना चाहिए। हालांकि, इन प्रभावों की वास्तविक सीमा निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक आकलन जरूरी होगा।

पहाड़ी ढलानों और जैव विविधता के अध्ययन पर जोर

पर्यावरण से जुड़े लोगों ने पहाड़ी ढलानों के कटाव और पानी की कमी जैसी आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए समग्र पर्यावरणीय अध्ययन कराने की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि जंगल, वन्यजीवों, नदी घाटी और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का एक साथ मूल्यांकन किया जाए।

निष्कर्ष:

कर्जत-भीमाशंकर क्षेत्र में प्रस्तावित हाइड्रोपावर परियोजना को लेकर विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सवाल सामने आए हैं। 32,000 से अधिक पेड़ों की प्रस्तावित कटाई, वन्यजीवों और जलस्रोतों पर संभावित असर तथा पर्यावरणीय अध्ययन की मांग इस विवाद के प्रमुख मुद्दे हैं। आगे की प्रक्रिया में इन चिंताओं का समाधान करने के लिए पारदर्शी जानकारी और विस्तृत पर्यावरणीय आकलन महत्वपूर्ण होंगे।

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