दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: छह CBI अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश

08 Oct 2026 - 15:42
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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: छह CBI अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक IRS अधिकारी की बर्खास्तगी से जुड़े मामले में छह CBI अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत के अनुसार, इन अधिकारियों पर अदालत के समक्ष एक महत्वपूर्ण तथ्य के संबंध में जानबूझकर गलत बयान देने के आरोप हैं। मामला उस समय किए गए पत्राचार से जुड़ा है, जब CBI संबंधित फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की संभावना पर विचार कर रही थी।

यह आदेश न्यायमूर्ति मधु जैन की एकल पीठ ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। अग्रवाल ने राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (PC Act) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें संबंधित CBI अधिकारियों के खिलाफ CrPC की धारा 340 के तहत कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया गया था।

छह CBI अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश को सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ कथित अपराधों को लेकर लिखित शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इन अधिकारियों के खिलाफ IPC की धारा 191, 193 और 209 के तहत दंडनीय अपराधों के कथित कृत्य पर कार्रवाई के लिए कहा है।

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायत को अदालत के निर्णय प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाए। पूरा विवाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ चलाए गए आय से अधिक संपत्ति के अभियोजन से जुड़ा है।

2002 के मंजूरी आदेश से शुरू हुआ मामला

अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन की आधारभूत कड़ी 26 नवंबर 2002 को पारित मंजूरी आदेश थी। बाद में इस मंजूरी को लेकर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। जनवरी 2016 में दिल्ली हाई कोर्ट ने मंजूरी को अमान्य घोषित कर दिया, जिसके बाद विशेष न्यायाधीश ने मार्च 2016 में अग्रवाल को बरी कर दिया।

इसके बाद CBI ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की संभावना पर विचार किया। मामले में 8 जून 2016 को विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से दी गई कानूनी राय में कहा गया था कि फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का कोई उचित आधार नहीं है। यह राय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के माध्यम से 1 जुलाई 2016 को CBI को सूचित की गई थी।

2 अगस्त 2016 के जवाब से उठा विवाद

मामले में आगे की कार्रवाई के दौरान अशोक कुमार अग्रवाल ने जांच के समय जब्त किए गए दस्तावेजों को जारी करने की मांग की। इस पर CBI ने 2 अगस्त 2016 को अपना जवाब दाखिल किया। कुछ दस्तावेज जारी किए जाने का विरोध करते हुए CBI ने कहा था कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है।

इसके बाद विशेष न्यायाधीश ने CBI को एक स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह बताने को कहा कि क्या मामले में कोई अपील या पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है अथवा ऐसी कोई याचिका लंबित है।

अग्रवाल ने धारा 340 के तहत दायर किया आवेदन

CBI के जवाब के बाद अशोक कुमार अग्रवाल ने 8 अगस्त 2016 को CrPC की धारा 340 के तहत आवेदन दाखिल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI की ओर से दिया गया बयान तथ्यात्मक रूप से गलत था। उनका कहना था कि उस समय प्रशासनिक मंत्रालय के साथ ऐसा कोई वास्तविक पत्राचार नहीं हुआ था और CBI को पहले ही विधि एवं न्याय मंत्रालय से मामले को उच्च मंच पर आगे न बढ़ाने संबंधी कानूनी राय मिल चुकी थी।

यही आरोप बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष भी विचार का विषय बना। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और घटनाक्रम की जांच के आधार पर CBI की ओर से किए गए पत्राचार और बाद में अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों की परिस्थितियों पर विचार किया।

8 अगस्त को ही आगे की कानूनी राय का प्रस्ताव भेजा गया

हाई कोर्ट ने अपनी जांच में पाया कि 8 अगस्त 2016 को ही CBI ने DoPT को मामले पर पुनर्विचार करने और आगे की कानूनी राय लेने का प्रस्ताव भेजा था। इसके अगले दिन, यानी 9 अगस्त 2016 को दाखिल अतिरिक्त जवाब में CBI ने कहा कि उसने जनवरी 2016 के फैसले को चुनौती देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया था और इस संबंध में प्रस्ताव 8 अगस्त को विभाग को भेजा गया था।

इसी घटनाक्रम के आधार पर हाई कोर्ट ने छह संबंधित CBI अधिकारियों के खिलाफ कथित अपराधों को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश के अनुसार शिकायत दर्ज होने के बाद इसे निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजा जाएगा।

निष्कर्ष

दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश अशोक कुमार अग्रवाल के आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI की ओर से अदालत के समक्ष रखे गए पत्राचार और बयानों से जुड़े विवाद पर आया है। अदालत ने छह CBI अधिकारियों के खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं के तहत लिखित शिकायत दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। अब शिकायत को चार सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

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