सातारा की महिला के पेट में तीन तरबूज जितना बड़ा ट्यूमर, करीब 3 घंटे चली जटिल सर्जरी
सातारा की रहने वाली कामकाजी महिला दीपाली अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहती थीं, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके पेट में एक बहुत बड़ा ट्यूमर विकसित हो चुका है। ट्यूमर का आकार बढ़ने के साथ उनका पेट फूलने लगा था। इसके अलावा पैरों में सूजन, चलने-फिरने में परेशानी और सांस फूलने जैसी समस्याएं भी सामने आने लगी थीं।
जुलाई 2026 में सोनोग्राफी के दौरान दीपाली को पहली बार पेट में मौजूद ट्यूमर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने सातारा और नवी मुंबई के कई डॉक्टरों और अस्पतालों से उपचार के लिए संपर्क किया। ट्यूमर का आकार काफी बड़ा होने और उससे जुड़े जोखिमों के कारण कई चिकित्सकों ने इसे जटिल मामला बताया।
इलाज की तलाश के दौरान एक महिला डॉक्टर ने उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल की वरिष्ठ प्राध्यापक और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. राजश्री दयानंद कटके के बारे में बताया। इसके बाद दीपाली ने डॉ. राजश्री से उपचार कराने का फैसला किया। डॉक्टरों की टीम ने जोखिमों को देखते हुए करीब तीन घंटे की सर्जरी के जरिए ट्यूमर को निकालने का प्रयास किया।
पेट में बढ़ता गया ट्यूमर, बढ़ने लगीं परेशानियां
ट्यूमर के बढ़ते आकार का असर दीपाली की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा था। पेट फूलने के साथ उनके पैरों में सूजन आ गई थी और चलने-फिरने में परेशानी होने लगी थी। उन्हें सांस फूलने की समस्या भी महसूस होने लगी।
जुलाई 2026 में सोनोग्राफी से स्थिति सामने आने के बाद उन्होंने उपचार के लिए अलग-अलग चिकित्सकों से संपर्क किया। सातारा और नवी मुंबई में इलाज के विकल्प तलाशने के दौरान उन्हें कई जगह इस मामले की जटिलता के बारे में बताया गया।
महिला डॉक्टर की सलाह से मिली विशेषज्ञ तक पहुंच
उपचार की तलाश के दौरान एक महिला डॉक्टर ने दीपाली को सेंट जॉर्ज अस्पताल की वरिष्ठ प्राध्यापक एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. राजश्री दयानंद कटके के बारे में जानकारी दी।
डॉ. राजश्री को बड़े आकार के ट्यूमर की सर्जरी का अनुभव बताया गया है। इससे पहले वह 30 किलो तक वजन वाले ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर चुकी हैं। इस जानकारी के बाद दीपाली ने उनके पास उपचार कराने का निर्णय लिया और सेंट जॉर्ज अस्पताल पहुंचीं।
ट्यूमर में मौजूद थीं बड़ी संख्या में रक्त वाहिकाएं
चिकित्सकों के अनुसार, दीपाली की सर्जरी कई कारणों से चुनौतीपूर्ण थी। सबसे बड़ी चुनौती ट्यूमर का काफी बड़ा आकार था। इसके अलावा ट्यूमर के भीतर बड़ी संख्या में रक्त वाहिकाएं मौजूद थीं, जिससे ऑपरेशन के दौरान जोखिम बढ़ गया था।
दीपाली को पहले से हृदय के वाल्व से जुड़ी समस्या भी थी। वहीं, बड़ा ट्यूमर पेट के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डाल रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा था, इसलिए सर्जरी में देरी को जोखिमपूर्ण माना गया।
इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की टीम को ऑपरेशन की योजना बेहद सावधानी से बनानी पड़ी।
करीब तीन घंटे तक चली जटिल सर्जरी
डॉक्टरों की टीम ने सभी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए दीपाली की सर्जरी की। यह ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला। सर्जरी के बाद उन्हें जरूरी उपचार और देखभाल दी गई।
डॉ. राजश्री के अनुसार, ट्यूमर के तेजी से बढ़ने के साथ मरीज की पहले से मौजूद स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को देखते हुए यह एक चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन था। ट्यूमर का बड़ा आकार, उसमें मौजूद रक्त वाहिकाएं और पेट के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ रहा दबाव सर्जरी को जटिल बना रहे थे।
समय पर उपचार से मिली राहत
सर्जरी और उसके बाद मिले उपचार से दीपाली को राहत मिली। इस मामले में ट्यूमर का समय रहते पता चलना और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचना महत्वपूर्ण रहा।
दीपाली के मामले ने यह भी सामने रखा कि शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य बदलावों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेने से स्थिति को समझने और उपचार की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
सातारा की दीपाली के पेट में तीन तरबूज जितना बड़ा ट्यूमर विकसित हो गया था, जिसके कारण उन्हें पेट फूलने, पैरों में सूजन, चलने-फिरने में परेशानी और सांस फूलने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जुलाई 2026 में सोनोग्राफी से ट्यूमर का पता चला। कई जगह उपचार की तलाश के बाद वह सेंट जॉर्ज अस्पताल पहुंचीं, जहां डॉ. राजश्री दयानंद कटके और उनकी टीम ने करीब तीन घंटे की चुनौतीपूर्ण सर्जरी की। समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने के बाद दीपाली को राहत मिली।
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