राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सुनीता यादव ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

06 Sep 2026 - 10:28
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राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सुनीता यादव ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने वाली शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खुशी का माहौल है। उनके प्रयासों ने विद्यालय को नवाचार आधारित शिक्षा के एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में पहचान दिलाई है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का अवसर

शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने पर जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक श्री सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि जिले की एक शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव की बात है। सुनीता यादव के नवाचारपूर्ण प्रयास जिले के अन्य शिक्षकों को भी नई सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।

प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र में रहते हुए बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने का सुनीता यादव का प्रयास सराहनीय है। यह उपलब्धि उनके साथ-साथ पूरे जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

मेहनत और नवाचार से तय किया सफलता का सफर

जिला महासमुंद के सांकरा में शिक्षक परिवार में जन्मीं सुनीता यादव छात्र जीवन से ही मेधावी रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में हुई। इसके बाद उन्होंने कला महाविद्यालय पिथौरा से स्नातक और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर से बी.एड. की उपाधि हासिल करने के बाद उन्होंने शिक्षण को अपना कर्मक्षेत्र चुना।

बरमकेला के व्यवसायी श्री नंदकुमार यादव से विवाह के बाद भी उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रियता और रचनात्मकता को जारी रखा। उनकी पुत्री सृजना यादव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की छात्रा हैं।

ग्रामीण कक्षा से राष्ट्रीय मंच तक

राष्ट्रपति के हाथों प्राप्त राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान सुनीता यादव की वर्षों की मेहनत और नवाचार को मिली राष्ट्रीय पहचान है। उन्होंने ग्रामीण विद्यालय की पारंपरिक कक्षा को साहित्य, तकनीक, नवाचार और संवेदनशील शिक्षा से जोड़कर बच्चों के लिए सीखने का जीवंत और रोचक मंच तैयार किया।

उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा है कि सीमित संसाधनों के बीच भी रचनात्मक सोच और निरंतर प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव लाया जा सकता है।

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