स्वच्छता केंद्र बना स्वरोजगार का सहारा, तारणी बाई ने गांव में ही शूरू की कमाई
मुंगेली विकासखण्ड के ग्राम पंचायत छतौना के आश्रित ग्राम बुचुआकापा की श्रीमती तारणी बाई ने यह साबित किया है कि स्वच्छता से जुड़ी पहल रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खोल सकती है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बनाए गए दुकानयुक्त सामुदायिक स्वच्छता परिसर को उन्होंने अपनी आजीविका का माध्यम बना लिया है।
तारणी बाई इस परिसर में किराना दुकान, जनरल स्टोर और सिलाई सेंटर संचालित कर रही हैं। पहले रोजगार के लिए गांव से बाहर जाने में उन्हें असहजता महसूस होती थी, लेकिन अब घर और गांव के नजदीक ही काम मिलने से वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
इस केंद्र से उन्हें हर महीने करीब 5 से 6 हजार रुपये की आय हो रही है। इससे वे परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग देने के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही हैं। इसके अलावा वे सामुदायिक स्वच्छता परिसर की साफ-सफाई, नियमित संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालती हैं।
तारणी बाई की यह पहल दिखाती है कि सरकारी योजनाओं के तहत तैयार किए गए स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ग्रामीण महिलाएं स्वच्छता के साथ स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह बना सकती हैं।
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