भौम प्रदोष पर शिव-मंगल की करें आराधना, कर्ज और जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए ऐसे करें पूजा
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह और भगवान हनुमान से माना जाता है। ऐसे में भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ मंगल देव और हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत करने से कर्ज, विवाद, आर्थिक परेशानियों और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना की जाती है। ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और भूमि से जुड़ा ग्रह माना गया है।
शिवलिंग पर जल और शहद अर्पित करें
भौम प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव व माता पार्वती का ध्यान करें। प्रदोष काल में शिवलिंग का जल से अभिषेक करें। इसके बाद तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें शहद मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। साथ ही बेलपत्र, फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का करें पाठ
कर्ज या आर्थिक परेशानियों से मुक्ति की कामना के लिए भौम प्रदोष पर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंगल देव की आराधना और स्तोत्र पाठ करने से ऋण संबंधी परेशानियों से राहत की कामना की जा सकती है।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का संक्षिप्त पाठ:
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।
स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मविरोधकः।।
लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः।।
अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः।।
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्।।
भौम प्रदोष पर ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
प्रदोष काल में शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
तांबे के पात्र से जल और शहद अर्पित करें।
बेलपत्र और फूल चढ़ाएं।
भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
हनुमान चालीसा या ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें।
अंत में शिव जी और हनुमान जी की आरती करें और श्रद्धापूर्वक अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)