कुपोषित बच्चों में टीबी की पहचान पर महाराष्ट्र सरकार का फोकस, NRC में जांच व्यवस्था होगी और मजबूत
महाराष्ट्र में कुपोषण से जूझ रहे बच्चों में टीबी की समय पर पहचान और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती बच्चों की टीबी स्क्रीनिंग, जांच और उपचार को लेकर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
लक्षण और संपर्क हिस्ट्री के आधार पर जांच
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कुपोषण के प्रमुख कारणों में बाल टीबी भी शामिल है। NRC में भर्ती बच्चों के लक्षणों के साथ यह भी देखा जाता है कि वे किसी टीबी मरीज के संपर्क में आए हैं या नहीं। जरूरत पड़ने पर बच्चों के नमूने लेकर सीबी-नैट और ट्रूनेट जांच कराई जाती है। इसके अलावा छाती का एक्स-रे जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जुलाई 2026 तक 2,835 बच्चों की जांच
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती 29,875 बच्चों में से 26,857 बच्चों की टीबी जांच की गई। यानी करीब 89.9 प्रतिशत बच्चों की स्क्रीनिंग पूरी हुई।
वहीं, 2026 में जुलाई तक 3,017 बच्चे NRC में भर्ती हुए, जिनमें से 94 प्रतिशत यानी 2,835 बच्चों की टीबी जांच की जा चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, टीबी के इलाज के लिए चिन्हित बच्चों की संख्या में भी कमी आई है। वर्ष 2022 में 23 बच्चों का टीबी उपचार शुरू किया गया था, जो 2025 में घटकर 7 रह गया। जुलाई 2026 तक यह संख्या 3 रही।
लक्षण नहीं फिर भी संपर्क में आए बच्चों पर नजर
टीबी मरीजों के संपर्क में आने वाले ऐसे बच्चों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे बच्चों की घर और NRC स्तर पर संपर्क जांच कर उन्हें जरूरत के मुताबिक टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट से जोड़ा जा रहा है।
वहीं, जटिल और दवा-प्रतिरोधी बाल टीबी मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए बाल टीबी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
निक्षय पोर्टल से जोड़ी जा रही जानकारी
टीबी जांच से संबंधित जानकारी को निक्षय पोर्टल से जोड़ने का काम जारी है। टीबी से पीड़ित बच्चों को उपचार के साथ पोषण सहायता उपलब्ध कराने के लिए निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र पहल से भी जोड़ा जा रहा है।
ज्यादा मरीज वाले NRC के पास लगेंगी जांच मशीनें
जिन पोषण पुनर्वास केंद्रों में मरीजों की संख्या अधिक है, उनके आसपास ट्रूनेट और सीबी-नैट मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने की योजना है। इससे बच्चों के नमूनों की जांच जल्द हो सकेगी और बीमारी की पुष्टि के बाद इलाज शुरू करने में होने वाली देरी कम होगी।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य सभी NRC में टीबी जांच का स्तर 90 प्रतिशत से अधिक बनाए रखना है। इसके साथ ही बाकी बच्चों की जांच पूरी करने, पात्र बच्चों को बचाव उपचार उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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