UPSC CSE: क्या नेपाल-भूटान के नागरिक बन सकते हैं IAS-IPS? जानें किसे मिलती है कौन-सी सेवा

08 Sep 2026 - 08:22
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UPSC CSE: क्या नेपाल-भूटान के नागरिक बन सकते हैं IAS-IPS? जानें किसे मिलती है कौन-सी सेवा

UPSC Civil Services Exam: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। हर साल लाखों अभ्यर्थी IAS, IPS, IFS समेत विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में जाने के लिए परीक्षा देते हैं। लेकिन क्या भारत के अलावा किसी दूसरे देश का नागरिक भी UPSC CSE में शामिल हो सकता है? खासकर नेपाल, भूटान और पाकिस्तान के नागरिकों को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। UPSC के नियम इस मामले में अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग पात्रता तय करते हैं।

IAS, IPS और IFS के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए कई ग्रुप ‘A’ और ग्रुप ‘B’ सेवाओं में नियुक्तियां होती हैं। हालांकि, IAS, IPS और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के लिए उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।

भारतीय नागरिकता जन्म, पंजीकरण या प्राकृतिककरण (Naturalisation) के माध्यम से प्राप्त हुई हो, इससे इन सेवाओं की पात्रता पर फर्क नहीं पड़ता। यानी जो व्यक्ति भारतीय नागरिक बन चुका है और बाकी निर्धारित शर्तें पूरी करता है, वह इन सेवाओं के लिए पात्र हो सकता है।

नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए क्या है नियम?

नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। यदि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो उन्हें IAS, IPS और IFS के लिए पात्रता नहीं मिलती। हालांकि, निर्धारित शर्तों के तहत वे अन्य केंद्रीय ग्रुप ‘A’ और ग्रुप ‘B’ सेवाओं के लिए UPSC CSE में शामिल हो सकते हैं।

इनमें भारतीय राजस्व सेवा (IRS), भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा (IAAS), रेलवे समेत अन्य केंद्रीय सेवाएं शामिल हो सकती हैं।

ऐसे उम्मीदवारों के लिए Certificate of Eligibility यानी पात्रता प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण होता है। अंतिम नियुक्ति से पहले गृह मंत्रालय (MHA) से यह प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक होता है।

पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए क्या है प्रावधान?

पाकिस्तान से आए लोगों के मामले में भी नियम उनकी नागरिकता और स्थिति पर निर्भर करते हैं। पाकिस्तान समेत कुछ देशों से भारत में स्थायी रूप से बसने आए भारतीय मूल के व्यक्तियों को निर्धारित शर्तों के तहत IAS, IPS और IFS को छोड़कर अन्य सेवाओं के लिए पात्रता मिल सकती है।

वहीं, यदि पाकिस्तान से आया कोई व्यक्ति बाद में भारतीय नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो भारतीय नागरिक के रूप में वह IAS, IPS और IFS के लिए भी पात्र हो सकता है, बशर्ते परीक्षा की अन्य सभी पात्रता शर्तें पूरी करता हो।

तिब्बती शरणार्थियों के लिए भी विशेष प्रावधान

नियमों में कुछ विशेष श्रेणियों के शरणार्थियों के लिए भी प्रावधान मौजूद हैं। 1 जनवरी 1962 से पहले भारत आए और स्थायी रूप से बसे तिब्बती शरणार्थी, निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर IAS, IPS और IFS को छोड़कर अन्य सेवाओं के लिए पात्र हो सकते हैं।

Certificate of Eligibility क्यों है जरूरी?

नेपाल, भूटान और नियमों के तहत पात्र अन्य विदेशी मूल के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा में शामिल होना ही अंतिम नियुक्ति की गारंटी नहीं है। नियुक्ति से पहले उनकी पात्रता की पुष्टि आवश्यक होती है और इसके लिए गृह मंत्रालय द्वारा जारी Certificate of Eligibility की जरूरत पड़ती है।

इसलिए ऐसे उम्मीदवारों को परीक्षा के चरणों में सफल होने के बाद पात्रता प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया समय रहते पूरी करनी चाहिए।

आसान भाषा में समझें पूरा नियम

भारतीय नागरिक: IAS, IPS, IFS समेत निर्धारित सभी सेवाओं के लिए पात्रता हो सकती है।

नेपाल/भूटान के नागरिक: IAS, IPS और IFS के लिए नहीं, लेकिन निर्धारित अन्य ग्रुप ‘A’ और ‘B’ सेवाओं के लिए पात्र हो सकते हैं।

पात्र भारतीय मूल के व्यक्ति/कुछ शरणार्थी श्रेणियां: निर्धारित शर्तों के तहत IAS, IPS और IFS को छोड़कर अन्य सेवाओं के लिए पात्र हो सकते हैं।

भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद: व्यक्ति भारतीय नागरिक के रूप में संबंधित सेवाओं की नागरिकता शर्त पूरी कर सकता है।

Certificate of Eligibility: जिन श्रेणियों के लिए यह लागू है, उनमें अंतिम नियुक्ति से पहले इसकी आवश्यकता होती है।

इस तरह UPSC में सिर्फ परीक्षा पास करना ही पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार की नागरिकता और संबंधित सेवा की पात्रता शर्तें भी यह तय करती हैं कि वह किस पद पर नियुक्त हो सकता है।

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