Chhattisगढ़ में जमीन की रजिस्ट्री के तुरंत बाद हुआ नामांतरण, ऑटोम्यूटेशन सुविधा से महीनों के इंतजार से मिली राहत

10 Oct 2026 - 15:18
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Chhattisगढ़ में जमीन की रजिस्ट्री के तुरंत बाद हुआ नामांतरण, ऑटोम्यूटेशन सुविधा से महीनों के इंतजार से मिली राहत

छत्तीसगढ़ में जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराने के लिए महीनों तक इंतजार करना अब जरूरी नहीं रह गया है। प्रदेश में लागू तकनीक आधारित ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम कोटकखर्रा, पोस्ट लालपुर निवासी मंगल सिंह सांडिया का अनुभव इस बदलाव को समझने का एक उदाहरण है। उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की सुविधा का लाभ लिया।

पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। संबंधित प्रक्रियाओं में समय लगने के कारण भूमि स्वामियों को कई बार महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। मंगल सिंह सांडिया के अनुसार, इस बार उन्हें ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और रजिस्ट्री के तुरंत बाद ही उनका नामांतरण हो गया। इससे उन्हें अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिली और सरकारी प्रक्रिया पूरी करने में लगने वाला समय भी बचा।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग के साथ संवाद के दौरान उन्होंने अपना अनुभव साझा किया। उनके अनुभव से यह बात सामने आती है कि पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रियाओं को तकनीक से जोड़ने पर आम नागरिकों को किस तरह सुविधा मिल सकती है।

 रजिस्ट्री के बाद महीनों के इंतजार से मिली राहत

मंगल सिंह सांडिया ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री पूरी होने के बाद नामांतरण कराने में काफी समय लगता था। कई बार इस प्रक्रिया को पूरा होने में महीनों लग जाते थे। इस दौरान भूमि से जुड़े अन्य कार्यों को आगे बढ़ाने में भी परेशानी होती थी। नामांतरण की स्थिति जानने और संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कार्यालयों में जाना भी लोगों के लिए अतिरिक्त काम बन जाता था।

हालांकि, इस बार उनका अनुभव पहले से अलग रहा। ऑटोम्यूटेशन सुविधा के कारण रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण हो गया। उन्हें इसके लिए अलग से लंबी प्रक्रिया पूरी करने और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी।

सांडिया ने इस बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण का काम पूरा हो जाना उनके लिए बड़ी राहत है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की व्यवस्था से आम नागरिकों का समय बचता है और सरकारी सेवाओं को लेकर भरोसा बढ़ाने में मदद मिलती है।

 क्या है ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था और कैसे करती है काम?

ऑटोम्यूटेशन ऐसी तकनीक आधारित व्यवस्था है, जिसके तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इसका उद्देश्य पंजीयन और राजस्व विभाग से जुड़ी प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बेहतर बनाना तथा नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों में जाकर औपचारिकताएं पूरी करने की परेशानी से राहत देना है।

परंपरागत प्रक्रिया में जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित राजस्व कार्यालय में प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत पड़ती थी। इस कारण नागरिकों को अतिरिक्त समय देना पड़ता था। नई व्यवस्था के अंतर्गत पंजीयन के बाद संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में तकनीक की मदद ली जा रही है।

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। हालांकि, नामांतरण से जुड़े मामलों में संबंधित अभिलेखों और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई का महत्व बना रहता है। ऑटोम्यूटेशन का लाभ यह है कि पंजीयन के बाद की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में मदद मिलती है।

ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भूमि स्वामियों को होगा लाभ

जमीन से जुड़े सरकारी काम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। किसानों और अन्य भूमि स्वामियों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण जैसी प्रक्रिया पूरी करने के लिए तहसील या राजस्व कार्यालय जाना पड़ सकता है। ऐसे में बार-बार कार्यालय पहुंचने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं।

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से इस प्रक्रिया को आसान बनाने की उम्मीद है। पंजीयन के बाद नामांतरण की कार्रवाई स्वतः आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से प्रक्रिया शुरू कराने की परेशानी कम हो सकती है। इससे कार्यालयीन कार्यवाही को व्यवस्थित करने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में भी सहायता मिलती है।

मंगल सिंह सांडिया का अनुभव इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उनके मामले में रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण पूरा होने से उन्हें लंबे इंतजार से राहत मिली। यह उदाहरण बताता है कि तकनीक आधारित सरकारी सेवाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब नागरिकों को रोजमर्रा के कामों में इसका सीधा लाभ मिलता है।

पंजीयन सेवाओं में सुधार के लिए सरकार की पहल

प्रदेश में पंजीयन सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए जा रहे हैं। ये प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप बताए गए हैं। वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन व्यवस्था में ऐसे बदलावों पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे नागरिकों को सरकारी प्रक्रियाओं में कम परेशानी हो।

रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ने वाली ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था इसी दिशा में किया गया एक महत्वपूर्ण सुधार है। इसका उद्देश्य पंजीयन के बाद होने वाली प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना और नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयीन कार्यवाही से राहत देना है।

इस व्यवस्था का प्रभाव केवल प्रक्रिया में तेजी तक सीमित नहीं है। सरकारी सेवाओं में तकनीक का उपयोग होने से नागरिकों को जानकारी और सुविधाएं अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ संबंधित मामलों में प्रक्रिया के सुचारु संचालन और विभागीय समन्वय पर निर्भर करता है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ से सामने आ रहे नागरिकों के अनुभव

‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर रहा है। इस पहल के तहत पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, नागरिकों को किन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मंगल सिंह सांडिया ने भी इसी अभियान के अंतर्गत अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण होने पर खुशी जताई और इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

उनका अनुभव पंजीयन सेवाओं में तकनीकी बदलावों के महत्व को रेखांकित करता है। ऐसे संवाद से विभाग को यह समझने में मदद मिल सकती है कि नई व्यवस्थाएं नागरिकों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो रही हैं और प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए किन पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंगल सिंह सांडिया का अनुभव दिखाता है कि तकनीक आधारित व्यवस्था से लंबे इंतजार और अनावश्यक कार्यालयीन दौड़भाग से राहत मिल सकती है। पंजीयन सेवाओं में ऐसे सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय बचाना, प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से सामने आ रहे अनुभव इस बात को समझने में मदद करते हैं कि इन बदलावों का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

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