छत्तीसगढ़ी को मिलेगा राष्ट्रीय पहचान का मंच? राज्यपाल रमेन डेका ने उठाया बड़ा कदम, बनेगी विशेष समिति

08 Sep 2026 - 17:41
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छत्तीसगढ़ी को मिलेगा राष्ट्रीय पहचान का मंच? राज्यपाल रमेन डेका ने उठाया बड़ा कदम, बनेगी विशेष समिति

रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में अब पहल तेज होती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने लोक भवन में राज्यपाल श्री रमेन डेका से मुलाकात कर भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के साथ इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग पर विस्तार से चर्चा की।

डेढ़ करोड़ लोगों की भाषा, समृद्ध है साहित्यिक विरासत

भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश और मानकीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा है तथा करीब डेढ़ करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।

भाषाविदों के अनुसार छत्तीसगढ़ी में 15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना और पत्रकारिता जैसी अनेक विधाओं में छत्तीसगढ़ी साहित्य उपलब्ध है।

राज्यपाल की पहल, इतिहास से लेकर शब्दकोश तक होगा दस्तावेजीकरण

राज्यपाल रमेन डेका ने इस विषय पर सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयासों के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति भाषा से जुड़ी ऐतिहासिक, साहित्यिक और अकादमिक सामग्री को व्यवस्थित रूप से संकलित करेगी।

इसमें छत्तीसगढ़ी के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और अन्य संदर्भ सामग्री को शामिल किया जाएगा। साथ ही विषय के विशेषज्ञों और विद्वानों से सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण दिया।

1890 में तैयार हुआ था छत्तीसगढ़ी का व्याकरण

भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा का व्याकरण 1890 में तैयार किया गया था, जबकि पहला शब्दकोश 1939 में सामने आया। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया था।

वर्तमान में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार श्री शीलकांत पाठक और श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित रहे।

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