रायपुर में सजेगा ‘लोकरंग पर्व’, तीन शाम लोकगीत, लोकगाथा और नृत्य से गूंजेगा मुक्ताकाशी मंच

05 Sep 2026 - 17:11
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रायपुर में सजेगा ‘लोकरंग पर्व’, तीन शाम लोकगीत, लोकगाथा और नृत्य से गूंजेगा मुक्ताकाशी मंच

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगाथाओं और पारंपरिक कलाओं को मंच देने के लिए संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के तहत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 6, 7 और 8 सितंबर को रायपुर के सिविल लाइंस स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर होगा। तीनों दिन कार्यक्रम की शुरुआत शाम 7 बजे से होगी।

एक मंच पर दिखेगा छत्तीसगढ़ का लोक वैभव

‘लोकरंग पर्व’ में प्रदेश की अलग-अलग लोक विधाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां एक ही मंच पर देखने को मिलेंगी। लोकगाथा, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य के जरिए छत्तीसगढ़ की परंपरा, लोकजीवन और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया जाएगा।

भरथरी-पंडवानी से नाचा और पंथी तक

आयोजन के दौरान भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत जैसी प्रसिद्ध लोक विधाओं की प्रस्तुतियां होंगी। इसके साथ ही सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी पारंपरिक गायन शैलियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की विविधता को दर्शकों के सामने रखा जाएगा।

लोक कलाकारों को मिलेगा अपनी कला दिखाने का मंच

‘लोकरंग पर्व’ का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं के संरक्षण और लोक कलाकारों को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन में ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं से जुड़ी सांस्कृतिक झलकियां भी देखने को मिलेंगी।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सांस्कृतिक विरासत

लोकगीत, लोकगाथा, पारंपरिक नृत्य और लोकनाट्य के जरिए छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। पारंपरिक वाद्यों की धुन और लोकनृत्यों की लय के बीच मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों से सराबोर रहेगा।

6 से 8 सितंबर तक चलेगा आयोजन

संस्कृति विभाग का यह आयोजन आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और प्रदेश की लोककलाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 6, 7 और 8 सितंबर को शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।

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