राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के 13 नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

15 Oct 2026 - 11:42
Updated: 12 days ago
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राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के 13 नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 12 अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। इस याचिका में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से संबंधित फैसलों को चुनौती दी गई है। विपक्ष ने चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की न्यायिक जांच कराने की मांग की है, ताकि प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच हो सके।

इस मामले को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। विपक्षी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि SIR के दौरान लिए गए कुछ फैसलों से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ चुनावी फैसलों को लेकर कथित आपत्तियों का उल्लेख किए जाने के बाद यह विवाद और चर्चा में आ गया।

याचिका में मुख्य रूप से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग के निर्णय लेने के तरीके और योग्य नागरिकों के मताधिकार से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत के समक्ष रखे जाने वाले तर्कों पर नजर रहेगी।

 राहुल गांधी समेत 13 नेताओं ने क्यों दायर की याचिका?

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 12 अन्य नेताओं ने 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर की थी। इसमें निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि संबंधित रिकॉर्ड की न्यायिक जांच कराई जाए, जिससे यह पता लगाया जा सके कि निर्णय निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए या नहीं।

याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष यह जांच कराना चाहता है कि क्या SIR प्रक्रिया के दौरान अधिकारों का इस्तेमाल मनमाने या एकतरफा तरीके से किया गया। हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और याचिका में उठाए गए सवाल हैं, जिन पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जाना है।

शुरुआत में याचिका में कुछ त्रुटियां पाई गई थीं। इसके बाद आवश्यक सुधार किए गए और याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। इसी वजह से अब इस मामले की अदालत में होने वाली कार्यवाही को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

याचिका दाखिल करने के दिन दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में मार्च निकाला। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मध्य दिल्ली में एकत्र हुए। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त को जवाबदेह बनाने की मांग की।

जब नेता और कार्यकर्ता मार्च कर रहे थे, उसी दौरान उनकी कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस घटनाक्रम के जरिए विपक्ष ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी से जुड़े अपने आरोपों को न्यायिक मंच पर उठाने की कोशिश की।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। खासकर, नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े फैसलों में पात्र नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस मामले में अदालत के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज और दलीलें आगे की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का दावा

इस पूरे विवाद में एक मीडिया रिपोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच जैसे विषय शामिल थे।

रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। इस मामले में विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

हालांकि, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने रिपोर्ट में सामने आए कथित मतभेदों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार, निर्णय लेने की प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों के सुझाव और आपत्तियां प्रशासनिक विचार-विमर्श का हिस्सा थीं।

SIR प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकार का मुद्दा

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है, ताकि उसमें नामों और संबंधित विवरणों की जांच की जा सके। इस प्रक्रिया को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कुछ फैसलों से पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने या उनके पंजीकरण पर असर पड़ने की आशंका है।

राहुल गांधी ने अपनी याचिका के जरिए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चिंता जताई है। विपक्ष का तर्क है कि हर योग्य नागरिक को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर याचिका में निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड की न्यायिक जांच की मांग की गई है।

यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची के प्रबंधन और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी उठाता है। अदालत में इन मुद्दों पर क्या दलीलें रखी जाती हैं और न्यायिक प्रक्रिया आगे किस दिशा में बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं की याचिका पर सुनवाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में नजर बनी हुई है। याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसलों की जांच, संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा और SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अपने आरोपों के समर्थन में दलीलें पेश की जा सकती हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग का पक्ष भी मामले में महत्वपूर्ण होगा। अदालत इन दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्यवाही तय करेगी।

फिलहाल, विपक्ष के आरोपों और निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बीच इस मामले का न्यायिक परीक्षण अहम है। अदालत की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आगे किस तरह विचार किया जाएगा।

निष्कर्ष

राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के 12 अन्य नेताओं की याचिका में SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के फैसलों की न्यायिक जांच की मांग की गई है। चुनाव आयुक्तों की कथित 14 आपत्तियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है, जबकि आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे की न्यायिक कार्यवाही इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगी।

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