बस्तर में राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप का शुभारंभ, सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर

08 Oct 2026 - 15:11
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बस्तर में राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप का शुभारंभ, सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर

मां दंतेश्वरी की पावन धरा बस्तर के जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के सुझाव और मार्गदर्शन में आयोजित यह नौवां सम्मेलन है। बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर के राष्ट्रीय विचार-मंथन का आयोजन किया जा रहा है।

वर्कशॉप का प्रमुख उद्देश्य सहकारिता आंदोलन के माध्यम से देश के दूरदराज, आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्रों तक आर्थिक समृद्धि और विकास का लाभ पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा करना है। सम्मेलन में केंद्र और राज्य स्तर के अधिकारियों के साथ विभिन्न राज्यों के सहकारिता विभागों के प्रतिनिधि तथा सहकारी संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए।

सहकारिता का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारिता की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर अंतिम छोर तक दिखाई दे। उन्होंने असम में शांति बहाली के बाद विकास की गति का उदाहरण देते हुए कहा कि बस्तर में भी सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

डॉ. भूटानी ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए देशभर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स स्थापित करने, उनका पूर्ण डिजिटलीकरण करने और उन्हें कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने पर भी जोर दिया।

पैक्स के विविधीकरण और आधुनिक क्षेत्रों पर चर्चा

सहकारिता सचिव ने नाबार्ड, एनसीडीसी और एनडीडीबी जैसी शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से पैक्स के कामकाज में विविधता लाने की जरूरत बताई। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में सहकारी समितियों के लिए नए अवसर तलाशने तथा सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत वित्तीय प्रबंधन से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया।

उनके अनुसार, सहकारी समितियों को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदलती जरूरतों के अनुरूप नए क्षेत्रों से जोड़ना आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ में 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय पैक्स

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मेलन में जुड़े छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने राज्य में सहकारिता के विस्तार को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सहकारिता को केवल खाद और ऋण वितरण तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विविधीकरण का माध्यम बनाया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन किया जा चुका है। इसके साथ ही डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज के क्षेत्र में भी इसी दिशा में कार्य किया जा रहा है। समितियों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने के साथ माइक्रो-एटीएम और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इससे ग्रामीण आबादी को नागरिक सेवाएं मिलने के साथ समितियों की आय बढ़ाने के अवसर भी बने हैं।

एथेनॉल संयंत्र और सप्लाई चेन को मजबूत करने की योजना

श्री विकास शील ने औद्योगिक विस्तार का उल्लेख करते हुए कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र के सफल मॉडलों की तरह इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल हासिल करने के लिए नेफेड, एनसीसीएफ और बीबीएसएसएल जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है।

वहीं तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा ने अपने राज्य का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि केंद्र के दिशा-निर्देशों के आधार पर तमिलनाडु ने एक, तीन और पांच वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट के साथ विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर उसे लागू किया है। राज्य का सहकारी तंत्र राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख संस्थाओं के साथ समन्वय कर प्राथमिक समितियों के उत्पादों के लिए मजबूत और प्रतिस्पर्धी बाजार तैयार करने पर काम कर रहा है।

बस्तर की चुनौतियों और सहकारिता की संभावनाओं पर मंथन

सत्र के शुभारंभ पर छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर में हाल में आई प्राकृतिक चुनौती का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि करीब 15 दिन पहले पूरा क्षेत्र भारी जलभराव से प्रभावित था और सम्मेलन का सभागार भी कई दिनों तक पानी में डूबा रहा। इसके बावजूद प्रशासन और पूरी टीम ने कम समय में परिसर को तैयार कर राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए उपयुक्त बनाया।

उन्होंने कहा कि बस्तर में सहकारिता के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और इनके माध्यम से स्थानीय आजीविका के अवसरों को आगे बढ़ाया जा सकता है। सम्मेलन की शुरुआत में देश में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। आयोजन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं ने अपने उत्पादों से संबंधित स्टॉल लगाए हैं।

दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे और सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवोन्मेषी प्रयासों की जानकारी देंगे। कार्यक्रम में बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव एवं पंजीयक तथा सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निष्कर्ष

जगदलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशॉप में सहकारिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, डिजिटल सेवाओं और नए आर्थिक क्षेत्रों से जोड़ने पर व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों के अनुभवों और छत्तीसगढ़ की पहलों के आदान-प्रदान के माध्यम से सम्मेलन में सहकारिता के जरिए दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों तक विकास के अवसर पहुंचाने की दिशा पर मंथन किया गया।

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