Delhi-NCR Air Quality: दशहरा के बाद बिगड़ी दिल्ली की हवा, AQI 227 पहुंचा; दिवाली से पहले बढ़ी प्रदूषण की चिंता

21 Oct 2026 - 10:31
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Delhi-NCR Air Quality: दशहरा के बाद बिगड़ी दिल्ली की हवा, AQI 227 पहुंचा; दिवाली से पहले बढ़ी प्रदूषण की चिंता

दिल्ली-एनसीआर में दशहरा के बाद वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई है। त्योहारों के बीच राजधानी की हवा एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 227 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इस मौसम में पहली बार दिल्ली की हवा इस स्तर तक खराब हुई है।

दशहरा के समापन के बाद दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब लोग दीपावली की तैयारियों में जुटे हैं। मंगलवार शाम शहर के कई इलाकों में रावण के पुतले जलाए गए और पटाखे फोड़े गए। इसके अलावा, खेतों में पराली जलाने की घटनाओं और मौसम में बदलाव का असर भी वायु गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार शाम चार बजे दिल्ली का AQI 179 था, जो बुधवार सुबह सात बजे बढ़कर 227 हो गया। यानी कुछ ही घंटों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में 48 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिवाली से पहले प्रदूषण का स्तर बढ़ने से राजधानी में हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दशहरा के बाद पहली बार खराब श्रेणी में पहुंची हवा

दिल्ली में बुधवार सुबह 7:05 बजे AQI 227 दर्ज किया गया। CPCB के अनुसार, यह इस मौसम की पहली खराब वायु गुणवत्ता रिपोर्ट है। मंगलवार शाम तक हवा मध्यम श्रेणी में थी, लेकिन रात के दौरान प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता रहा। आंकड़ों के अनुसार, AQI रात करीब दो बजे 200 के स्तर को पार कर गया और उसके बाद इसमें गिरावट दर्ज नहीं की गई।

दशहरा समारोह के दौरान राजधानी के विभिन्न हिस्सों में पुतले जलाए गए और पटाखे फोड़े गए। इससे निकलने वाले धुएं और कणों ने प्रदूषण में योगदान दिया। दुर्गा पूजा के आयोजनों से होने वाले उत्सर्जन के साथ इन गतिविधियों का असर भी हवा की गुणवत्ता पर पड़ा।

त्योहारों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के बीच मौसम की परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। तापमान में गिरावट और हवा की गति में बदलाव के कारण प्रदूषकों का फैलाव प्रभावित होता है, जिससे वे वातावरण में जमा हो सकते हैं।

अक्टूबर में AQI के आंकड़ों में लगातार उतार-चढ़ाव

अक्टूबर के अधिकांश दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी रही। हालांकि, महीने के दौरान प्रदूषण के स्तर में कई बार बदलाव देखने को मिला। 12 और 16 अक्टूबर को बारिश के बाद हवा की गुणवत्ता में कुछ समय के लिए सुधार दर्ज किया गया था।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 187, 19 अक्टूबर को 139 और 20 अक्टूबर को 179 दर्ज किया गया। इसके बाद बुधवार सुबह सूचकांक बढ़कर 227 पर पहुंच गया और हवा खराब श्रेणी में चली गई।

इससे पहले दिल्ली में 12 और 13 जुलाई को भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई थी। उस दौरान AQI क्रमशः 261 और 246 रहा था। अक्टूबर में दर्ज हुई ताजा गिरावट ने एक बार फिर राजधानी में वायु प्रदूषण की स्थिति को चर्चा में ला दिया है।

जहांगीरपुरी और पूसा में AQI 300 के पार

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की स्थिति एक जैसी नहीं रही। CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के 59 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 56 के आंकड़े उपलब्ध थे। इनमें दो स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

जहांगीरपुरी में AQI 308 और पूसा में 314 दर्ज किया गया। दोनों स्थानों पर सूचकांक 300 के पार पहुंचने से प्रदूषण की गंभीरता सामने आई। वहीं, आनंद विहार समेत 16 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी रही।

ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग है। कुछ क्षेत्रों में हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जबकि जहांगीरपुरी और पूसा जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर बहुत खराब श्रेणी तक पहुंच गया।

पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की 182 घटनाएं दर्ज

दिल्ली में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बीच पंजाब और हरियाणा में खेतों में आग लगने की घटनाओं पर भी नजर रखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, NASA के उपग्रह ने 20 अक्टूबर तक के तीन दिनों में दोनों राज्यों में खेतों में आग लगने की 182 घटनाएं दर्ज कीं। वहीं, 1 अक्टूबर से अब तक ऐसी घटनाओं की कुल संख्या 397 रही है।

पिछले साल इसी अवधि में खेतों में आग लगने की 523 घटनाएं दर्ज की गई थीं। हालांकि, इस तुलना के आधार पर मौजूदा स्थिति का पूरा आकलन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि उपग्रह के आंकड़ों की कुछ सीमाएं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, उपग्रह दोपहर लगभग 1:30 बजे संबंधित क्षेत्र के ऊपर से गुजरता है, जबकि खेतों में आग लगाने की अधिकतर घटनाएं दिन के बाद के समय होती हैं। इस कारण उपग्रह द्वारा दर्ज घटनाओं की संख्या वास्तविक संख्या से कम हो सकती है। इसलिए, कम दर्ज आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि पराली जलाने की घटनाएं वास्तव में कम हो गई हैं।

AQI की श्रेणियां क्या बताती हैं?

CPCB वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार पर हवा को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इससे प्रदूषण के स्तर को समझने में मदद मिलती है।

  • 0 से 50 AQI: अच्छा
  • 51 से 100 AQI: संतोषजनक
  • 101 से 200 AQI: मध्यम
  • 201 से 300 AQI: खराब
  • 301 से 400 AQI: बहुत खराब
  • 401 से 500 AQI: गंभीर

दिल्ली में बुधवार सुबह दर्ज किया गया AQI 227 खराब श्रेणी में आता है। वहीं, जहांगीरपुरी और पूसा में सूचकांक 300 से अधिक होने के कारण वहां हवा बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

निष्कर्ष

दशहरा के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता में आई गिरावट ने दिवाली से पहले प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। AQI का 179 से बढ़कर 227 तक पहुंचना, कुछ इलाकों में सूचकांक का 300 पार करना और पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं इस स्थिति के प्रमुख पहलू हैं। आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियां और प्रदूषण के विभिन्न स्रोत राजधानी की हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

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