रायपुर रेल मंडल में कवच 4.0 का विस्तार, दुर्ग से मांढर तक 70 रूट किलोमीटर रेलमार्ग पर कमीशनिंग पूरी
रायपुर/बिलासपुर। भारतीय रेल में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के जरिए रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल ने एक महत्वपूर्ण कार्य पूरा किया है। रायपुर मंडल में दुर्ग से मांढर तक 70 रूट किलोमीटर के सभी रेल मार्गों के साथ-साथ सरोना-उरकुरा बाईपास लाइन पर स्टैंडर्ड कवच की कमीशनिंग 3 अक्टूबर को पूरी कर ली गई है। इस विस्तार के बाद इस रेल खंड पर आधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के माध्यम से संरक्षित परिचालन का दायरा बढ़ गया है।
परियोजना के तहत रेल मार्ग पर 984 ट्रैकसाइड आरएफआईडी टैग्स लगाए गए हैं। इन टैग्स को अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था के साथ स्थापित और प्रोग्राम किया गया है। आरएफआईडी प्रणाली को कवच 4.0 के तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप लागू किया गया है। इससे रेल परिचालन में ट्रेन की स्थिति और गति से संबंधित जानकारी के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी स्तर पर मजबूत करने में मदद मिलती है।
दुर्ग से मांढर तक कवच का विस्तार
रायपुर मंडल में कवच प्रणाली के विस्तार का प्रमुख हिस्सा दुर्ग से मांढर तक फैला 70 रूट किलोमीटर का रेल मार्ग है। इस पूरे रेल मार्ग के सभी हिस्सों में स्टैंडर्ड कवच की कमीशनिंग पूरी की गई है। इसके अलावा सरोना-उरकुरा बाईपास लाइन को भी इस परियोजना के दायरे में शामिल किया गया है।
3 अक्टूबर को कमीशनिंग का काम पूरा होने के साथ इस क्षेत्र में कवच आधारित संरक्षा व्यवस्था का विस्तार हुआ है। रेलवे के लिए ऐसे तकनीकी सिस्टम का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि ट्रेन परिचालन के दौरान गति, स्थिति और संभावित जोखिम से जुड़ी जानकारी का उपयोग संरक्षित संचालन में किया जा सकता है।
984 ट्रैकसाइड RFID टैग्स की स्थापना
इस परियोजना के अंतर्गत कुल 984 ट्रैकसाइड आरएफआईडी टैग्स स्थापित और प्रोग्राम किए गए हैं। इन टैग्स को अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था के साथ लगाया गया है। रेलवे की ओर से आरएफआईडी प्रणाली का कार्यान्वयन कवच 4.0 के तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप किया गया है।
आरएफआईडी आधारित व्यवस्था कवच प्रणाली के तकनीकी ढांचे का एक हिस्सा है। ट्रैकसाइड पर स्थापित उपकरणों से प्राप्त जानकारी का उपयोग ट्रेन की स्थिति और परिचालन से जुड़ी प्रणाली को आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराने में किया जाता है। इस तरह तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था को रेल परिचालन के साथ जोड़ा गया है।
क्या है भारतीय रेलवे का कवच सिस्टम
कवच भारतीय रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा विकसित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। इसका उद्देश्य ट्रेन परिचालन के दौरान सुरक्षा से जुड़ी स्थितियों में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।
यह प्रणाली ट्रेनों की गति और स्थिति से संबंधित जानकारी के आधार पर संरक्षित परिचालन में सहायता करती है। आवश्यकता पड़ने पर कवच स्वचालित ब्रेकिंग के माध्यम से ट्रेन को सुरक्षित रूप से रोकने में सक्षम है। इस वजह से ट्रेन के संचालन में मानवीय नियंत्रण के साथ तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कवच का इस्तेमाल विशेष रूप से उन परिस्थितियों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जाता है, जहां ट्रेन की गति या उसकी आगे की स्थिति के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत हो सकती है। इस प्रणाली का विस्तार रेलवे के आधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन नेटवर्क को आगे बढ़ाने से जुड़ा है।
आमने-सामने और पीछे से टक्कर के जोखिम से सुरक्षा
कवच से लैस लोकोमोटिव में कई महत्वपूर्ण संरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इनमें संभावित आमने-सामने की टक्कर से बचाव की सुविधा शामिल है। इसके अलावा पीछे से होने वाली संभावित टक्कर के जोखिम को कम करने के लिए भी यह प्रणाली सुरक्षा सहायता प्रदान करती है।
ट्रेन के अनियंत्रित रूप से आगे बढ़ने की स्थिति में भी कवच सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराता है। इसी तरह स्टैंडस्टिल यानी ट्रेन के स्थिर खड़े रहने के दौरान होने वाली अनावश्यक मूवमेंट से सुरक्षा की सुविधा भी इसमें शामिल है। ये सभी सुविधाएं ट्रेन परिचालन के दौरान विभिन्न संभावित जोखिम वाली परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी आधार देती हैं।
असामान्य स्थिति में SOS सुरक्षा सुविधा
कवच प्रणाली में असामान्य रूप से ट्रेन रुकने की स्थिति के लिए ऑनबोर्ड एसओएस सुरक्षा सुविधा भी उपलब्ध है। यह सुविधा कवच से लैस लोकोमोटिव में दी गई प्रमुख संरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है।
कवच की विभिन्न सुविधाओं को ट्रेन के परिचालन से जुड़ी परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन किया गया है। ट्रेन की गति और स्थिति से संबंधित जानकारी के आधार पर प्रणाली संरक्षित परिचालन में सहायता करती है। जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग के जरिए ट्रेन को रोकने की क्षमता भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
रायपुर मंडल में बढ़ा आधुनिक संरक्षा प्रणाली का दायरा
दुर्ग से मांढर तक 70 रूट किलोमीटर और सरोना-उरकुरा बाईपास लाइन पर कवच की कमीशनिंग पूरी होने के बाद रायपुर मंडल में आधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली का कवरेज बढ़ा है। परियोजना में 984 ट्रैकसाइड आरएफआईडी टैग्स की स्थापना और प्रोग्रामिंग भी की गई है।
इस विस्तार से रायपुर मंडल में कवच आधारित संरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया है। रेलवे परिचालन में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह व्यवस्था ट्रेनों की गति और स्थिति से जुड़ी जानकारी के आधार पर संरक्षित संचालन में सहायता करेगी। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग जैसी सुविधा भी ट्रेन सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।
निष्कर्ष
रायपुर मंडल में कवच की कमीशनिंग का यह विस्तार आधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन तकनीक को रेल नेटवर्क के और हिस्सों तक पहुंचाने से जुड़ा है। दुर्ग से मांढर तक 70 रूट किलोमीटर और सरोना-उरकुरा बाईपास लाइन पर यह कार्य पूरा होने के साथ 984 ट्रैकसाइड आरएफआईडी टैग्स को भी कवच 4.0 के अनुरूप स्थापित एवं प्रोग्राम किया गया है। इससे रायपुर मंडल में संरक्षित और तकनीक आधारित रेल परिचालन की व्यवस्था का दायरा आगे बढ़ा है।
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