पति के निधन के बाद टूटा परिवार का सहारा, बेटियों के भविष्य के लिए सरकार बनी मददगार
दुर्ग। पति के अचानक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी अकेले संभालना किसी भी महिला के लिए बड़ी चुनौती होती है। दुर्ग जिले के ग्राम जंजगिरी की श्रीमती उमा बाई साहू के सामने भी ऐसी ही मुश्किल घड़ी आई। पति के निधन के बाद परिवार की आय का मुख्य जरिया खत्म हो गया और तीन बेटियों की पढ़ाई से लेकर घर की रोजमर्रा की जरूरतों तक की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
ऐसे कठिन समय में छत्तीसगढ़ शासन की मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना उमा बाई के परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आई। उनके पति स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार साहू का असंगठित श्रमकार्ड खेतिहर मजदूर के रूप में पंजीकृत था। पति के निधन के बाद उमा बाई ने इसी श्रमकार्ड के आधार पर योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया।
आवेदन के बाद मिली एक लाख रुपये की सहायता
श्रम विभाग द्वारा आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उमा बाई साहू को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार के लिए यह राशि मुश्किल समय में महत्वपूर्ण सहारा बनी।
उमा बाई के लिए सबसे बड़ी चिंता उनकी तीन बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर थी। सहायता राशि मिलने से उन्हें बेटियों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और अन्य जरूरी जिम्मेदारियों को संभालने में राहत मिली।
मुश्किल दौर में मिला हौसला
उमा बाई साहू ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी अचानक उनके ऊपर आ गई थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर लगातार चिंता बनी रहती थी। सरकार से मिली सहायता ने इस कठिन दौर में उन्हें काफी संबल दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रमिक परिवारों के लिए संचालित योजनाएं विपरीत परिस्थितियों में बड़ी मदद साबित हो रही हैं।
श्रमिक परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना का उद्देश्य संकट की स्थिति में पात्र श्रमिक परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। उमा बाई साहू का मामला इस बात का उदाहरण है कि समय पर मिलने वाली सरकारी सहायता किसी परिवार को आर्थिक मुश्किलों के बीच अपनी जिम्मेदारियां आगे बढ़ाने का हौसला दे सकती है।
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