कवर्धा मेडिकल कॉलेज में नए सफर की शुरुआत, पहले बैच के छात्रों को मिला सेवा का मंत्र
कवर्धा। कबीरधाम जिले के लिए चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत हुई है। शासकीय मेडिकल कॉलेज कवर्धा में पहले शैक्षणिक सत्र और प्रथम बैच की पढ़ाई का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा और सांसद संतोष पाण्डेय ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। विद्यार्थियों को एप्रॉन, स्टेथोस्कोप, पेन और गुलाब का फूल भेंट कर उनके नए शैक्षणिक सफर के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि डॉक्टर बनना निश्चित रूप से एक बड़ा सपना है, लेकिन इसे अंतिम मंजिल नहीं समझना चाहिए। असली उद्देश्य डॉक्टर बनने के बाद अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग समाज की सेवा में करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित मेहनत करने और पढ़ाई के दौरान बेवजह तनाव न लेने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में उनके परिवार और समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए आगे बढ़ने के बाद उनके प्रति जिम्मेदारी और सेवा की भावना बनाए रखना जरूरी है।
छात्रों से जानी तैयारी की कहानी
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज के प्रथम बैच के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी सफलता की कहानी जानी। उन्होंने पूछा कि छात्रों ने प्रवेश परीक्षा के लिए किस तरह तैयारी की, कितने घंटे पढ़ाई की और कोचिंग या स्व-अध्ययन में से किस माध्यम का इस्तेमाल किया।
राजनांदगांव की अतिथि देवांगन ने बताया कि वह दूसरे प्रयास में सफल हुईं और उनके पिता ने लगातार उन्हें प्रोत्साहित किया। भूपेंद्र सिंह ने ऑनलाइन कोचिंग के जरिए तैयारी की, जबकि कवर्धा के धरमपुरा निवासी आकाश धुर्वे ने लाइब्रेरी में स्व-अध्ययन को प्राथमिकता दी। भिलाई की हर्षिता ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। अंशिता सिंह के पिता ने बताया कि बेटी की तैयारी में मॉक टेस्ट और मार्गदर्शन के जरिए उन्होंने सहयोग किया।
विद्यार्थियों ने बताया कि वे प्रतिदिन करीब 8 घंटे किताबों से और 3 से 4 घंटे डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाई करते थे। ऑनलाइन कक्षाओं के चलते कुछ छात्रों को रोजाना 7 से 8 घंटे तक स्क्रीन पर भी पढ़ना पड़ता था।
सेवा और संवेदनशीलता को बताया चिकित्सा की पहचान
सांसद संतोष पाण्डेय ने प्रथम बैच के विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से कवर्धा में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत संभव हुई है। वहीं कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने कहा कि कठिन मेहनत के बाद मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उपलब्धि है, लेकिन यह मंजिल नहीं बल्कि नई शुरुआत है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मरीज जब डॉक्टर के पास पहुंचता है तो उसके मन में स्वस्थ होने की उम्मीद होती है। इसलिए एक डॉक्टर के लिए ज्ञान के साथ सेवा भावना और संवेदनशीलता भी बेहद जरूरी है।
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