SIR विवाद: मीडिया रिपोर्ट के 4 दावों पर BJP का फैक्ट चेक, ERO की शक्तियों से लेकर Form 6 तक जानें पूरा मामला
देशभर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच SIR से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई दावे किए गए, जिन पर अब भारतीय जनता पार्टी ने अपना पक्ष सामने रखा है।
बीजेपी ने अपने X हैंडल पर एक वीडियो जारी कर मीडिया रिपोर्ट में सामने आए चार प्रमुख दावों का फैक्ट चेक किया। पार्टी की ओर से इन दावों को खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया में ERO और AERO की भूमिका, SIR के चरणों तथा Form 6 से जुड़े प्रावधानों पर जानकारी दी गई। वहीं, चुनाव आयोग ने भी 23 सितंबर 2026 की प्रेस नोट में कहा कि आयोग के भीतर लिखित टिप्पणियां, सुझाव और आंतरिक जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा उसके सभी आधिकारिक निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
SIR को लेकर क्या है पूरा विवाद?
मीडिया रिपोर्ट में SIR के दौरान मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम की भूमिका, Form 6 में कथित बदलाव और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कई मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
इसी रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी सामने आई। बीजेपी ने अब रिपोर्ट में किए गए दावों के जवाब में अपनी ओर से तथ्य रखे हैं।
1. क्या फाइनल वोटर लिस्ट ECI का IT विभाग तय कर रहा है?
दावा: मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि फाइनल वोटर लिस्ट में किसका नाम रहेगा, इसका फैसला चुनाव आयोग का आईटी विभाग कर रहा है और ERO की शक्तियां समाप्त हो गई हैं।
फैक्ट चेक: राजौरी गार्डन की ERO इती अग्रवाल के हवाले से बीजेपी ने कहा कि यह दावा सही नहीं है। उनके मुताबिक अभी भी लोगों के आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं और SIR प्रक्रिया के तहत नाम जोड़े जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ERO को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित अधिकार प्राप्त हैं और नाम जोड़ने वाले सॉफ्टवेयर तक ERO की पहुंच भी है।
2. क्या SIR की पूरी प्रक्रिया केंद्रीयकृत कर दी गई है?

दावा: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि SIR की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीय स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया है।
फैक्ट चेक: इस दावे के जवाब में राजौरी गार्डन के AERO नवीन कुमार का बयान सामने रखा गया। उनके अनुसार SIR की प्रक्रिया बूथ स्तर से शुरू होती है और अलग-अलग अधिकारियों के माध्यम से आगे बढ़ती है।
प्रक्रिया का क्रम:
- BLO — बूथ लेवल अधिकारी
- AERO — सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी
- ERO — निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी
- DEO — जिला निर्वाचन अधिकारी
नवीन कुमार ने कहा कि प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है।
3. क्या Form 6 में चुनाव आयोग ने बदलाव किया है?
दावा: मीडिया रिपोर्ट में SIR के दौरान Form 6 में बदलाव किए जाने का सवाल उठाया गया।
फैक्ट चेक: AERO नवीन कुमार के अनुसार फिलहाल SIR के दौरान डिक्लेरेशन फॉर्म भरा जा रहा है और इसमें आधार वर्ष 2002 रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह डिक्लेरेशन फॉर्म नहीं भरा जाएगा।
Form 6 में बदलाव की शक्ति को लेकर भी अलग सवाल उठाया गया है। इस मामले में बीजेपी के फैक्ट चेक में कहा गया कि Form 6 में बदलाव का अधिकार केवल सरकार के पास है। वहीं, SIR को लेकर चुनाव आयोग को अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत प्रक्रिया संचालित करने की स्वतंत्रता होने की बात रखी गई है।
4. क्या दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई?
दावा: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के कई फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई।
फैक्ट चेक: चुनाव आयोग ने इस दावे के संदर्भ में कहा कि चर्चा के दौरान सुझाव देना अपने आप में असहमति नहीं माना जा सकता। आयोग के अनुसार आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय सभी तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
चुनाव आयोग ने प्रेस नोट में क्या कहा?

23 सितंबर 2026 की प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी किए जाते हैं।
आयोग के मुताबिक, हाल के महीनों में कई फैसले, निर्देश और चुनावी सुधारों से जुड़े कदम पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। आयोग ने SIR समेत मतदाता सूची के संशोधन से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया है।
निष्कर्ष
SIR को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। रिपोर्ट में उठाए गए चार प्रमुख मुद्दों पर बीजेपी ने ERO की शक्तियों, SIR की चरणबद्ध प्रक्रिया, Form 6 और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर अपना पक्ष रखा है। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि आंतरिक सुझाव और टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा अंतिम फैसले निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)