AI से बदलेगी हेल्थकेयर की तस्वीर, ग्लोबल साउथ के लिए भारत ने साझा किया डिजिटल हेल्थ मॉडल
न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष चर्चा में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में अपने अनुभव को दुनिया के सामने रखा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है।
‘ग्राउंडिंग द फ्रंटियर: ए ग्लोबल साउथ AI फ्रेमवर्क’ विषय पर आयोजित इस सत्र में उन्होंने भारत की हेल्थ-टेक यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आधार से शुरू हुआ डिजिटल आधार आगे चलकर आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और ABHA ID जैसे प्लेटफॉर्म से मजबूत हुआ। इससे एक ऐसे डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को विकसित करने में मदद मिली, जो बड़े स्तर पर काम करने के साथ अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल स्थापित कर सकता है।
AI से बीमारी की पहचान और इलाज में मदद
श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला। AI आधारित क्लिनिकल निर्णय सहायता, लंबे समय के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण और बीमारी के हॉटस्पॉट की पहचान जैसे क्षेत्रों में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि AI मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाना जरूरी है।
चर्चा के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए भारत की ‘AI इन हेल्थकेयर’ रणनीति का भी उल्लेख किया गया। कार्यक्रम में AI कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, अमेरिकी नीति-निर्माताओं, थिंक टैंक और अन्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा का फोकस ऐसे AI सिस्टम तैयार करने पर रहा, जो समावेशी, जिम्मेदार और ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप हों।
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