बुलेट ट्रेन की रफ्तार को मिलेगी नई तकनीक, रेलवे में पहली बार मूवेबल क्रॉसिंग का इस्तेमाल
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में भारतीय रेलवे पहली बार मूवेबल क्रॉसिंग यानी स्विंग-नोज क्रॉसिंग वाले हाई-स्पीड टर्नआउट का इस्तेमाल कर रहा है। यह तकनीक 320 किमी/घंटा तक की रफ्तार को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य तेज रफ्तार ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और स्मूद बनाना है।
नई तकनीक में क्रॉसिंग नोज को जरूरत के अनुसार मूव कराया जाता है, जिससे पटरी पर पहियों के गुजरने के लिए गैप नहीं रहता। इससे ट्रेन के टर्नआउट से गुजरते समय झटके, कंपन और शोर कम होने के साथ-साथ पहियों और पटरियों की घिसावट भी घटाने में मदद मिलेगी।
इस हाई-स्पीड टर्नआउट में दो पॉइंट मशीनें लगाई गई हैं। एक मशीन स्विच रेल्स को नियंत्रित करती है, जबकि दूसरी मूवेबल क्रॉसिंग नोज को ऑपरेट और लॉक करती है। दोनों मशीनें सिग्नलिंग सिस्टम के साथ सिंक्रोनाइज होकर काम करती हैं और ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति तभी मिलती है, जब दोनों की सही पोजिशन और लॉकिंग की पुष्टि हो जाए।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पहले सेक्शन में 2027 से सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। सेवा शुरू करने से पहले ट्रेन की बड़े स्तर पर टेस्टिंग होगी। फिलहाल ट्रेन की बॉडी की मजबूती जांचने के लिए ‘स्क्वीज टेस्ट’ समेत कई परीक्षण किए जा रहे हैं।
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