चिप्स-बिस्कुट पर खर्च घटाएं, बच्चों की थाली में पोषण बढ़ाएं
बच्चों की सेहत के लिए बड़े बदलाव हमेशा महंगे नहीं होते। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में सुधार करके परिवार बच्चों के भोजन को अधिक पौष्टिक बना सकते हैं। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए जंक फूड पर होने वाले अनावश्यक खर्च को पौष्टिक भोजन की ओर मोड़ने का संदेश दिया जा सकता है।
चिप्स, नमकीन, क्रीम बिस्कुट, चॉकलेट और मीठे पेय पर रोजाना खर्च होने वाली छोटी रकम महीने में एक बड़ी राशि बन सकती है। इसी बजट में भुना चना, मूंगफली, केला, मौसमी फल, पोहा, उपमा, दूध, दही या घर का बना नाश्ता शामिल किया जा सकता है। इससे खर्च का बेहतर उपयोग करते हुए बच्चों के भोजन में विविधता लाई जा सकती है।
‘पैकेट’ से ‘प्लेट’ की ओर बदलाव
बच्चों की खाने की आदतें धीरे-धीरे बदलना अधिक आसान होता है। पैकेट वाले स्नैक्स की जगह चना-मूंगफली, नमकीन की जगह सब्जियों वाला पोहा या चिवड़ा, मीठे पेय की जगह दूध या छाछ और इंस्टेंट नूडल्स की जगह घर का पोषक नाश्ता विकल्प बन सकता है।
पोषण के लिए महंगे खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं हैं। दालें, चना, मूंगफली, सोयाबीन, रागी व अन्य मोटे अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध-दही और अंडे जैसे उपलब्ध खाद्य पदार्थ भोजन को पौष्टिक और विविध बनाने में मदद कर सकते हैं।
बच्चों को केवल जंक फूड से दूर रहने के लिए कहने के बजाय उन्हें स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। घर में पोषण को प्राथमिकता देने की शुरुआत छोटे कदमों से की जा सकती है।
सेवा संकल्प के साथ पोषण का संकल्प भी लिया जाए—अनावश्यक खर्च कम हो, स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा मिले और बच्चों की थाली में पौष्टिक विकल्प बढ़ें। यही छोटे प्रयास स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव बन सकते हैं।
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