गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में जल संरक्षण की पहल: डोंगरी टोला में 3 हजार कंटूर ट्रेंच से 24.30 लाख लीटर वर्षा जल संग्रहण की क्षमता विकसित
रायपुर। जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में लगभग 3 हजार स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इन संरचनाओं के माध्यम से 24 लाख 30 हजार लीटर वर्षा जल संग्रहण की क्षमता विकसित हुई है। इस पहल से वर्षा जल को सहेजने, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में बारिश का पानी तेजी से बहकर निकल जाता है। इसके कारण वर्षा जल का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता और जमीन में नमी बनाए रखना भी चुनौती बन जाता है। डोंगरी टोला में इस समस्या को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक पद्धति से कंटूर ट्रेंच बनाई गई हैं, ताकि बारिश के पानी को रोककर धीरे-धीरे जमीन में समाहित किया जा सके।
इस पहल का लाभ विशेष रूप से उन लगभग 250 ग्रामीण परिवारों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें गर्मी के दिनों में पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। जल संरक्षण के साथ इस निर्माण कार्य से स्थानीय श्रमिकों को रोजगार भी मिला है। इस तरह डोंगरी टोला में प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।
पहाड़ी ढलानों पर कंटूर ट्रेंच से रुकेगा वर्षा जल का बहाव
पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान पानी ढलानों से तेजी से नीचे बह जाता है। इससे पानी जमीन के भीतर समाने के लिए पर्याप्त समय नहीं पाता और मिट्टी के कटाव की समस्या भी बढ़ सकती है। इसी चुनौती को देखते हुए ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है।
ये ट्रेंच पहाड़ी ढलानों पर क्रमबद्ध तरीके से बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य बारिश के पानी की गति को कम करना और उसे कुछ समय तक रोककर रखना है। इससे पानी को जमीन में समाने का अवसर मिलता है और भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है। इस व्यवस्था से वर्षा जल का बेहतर उपयोग करने के साथ क्षेत्र की भूमि और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में भी सहायता मिलने की संभावना है।
24 लाख 30 हजार लीटर जल संग्रहण क्षमता से बढ़ेगी जल सुरक्षा
डोंगरी टोला में बनाई गई लगभग 3 हजार कंटूर ट्रेंच की कुल जल संग्रहण क्षमता 24 लाख 30 हजार लीटर है। बारिश के दौरान इन संरचनाओं में पानी एकत्र होने से आसपास की जमीन में नमी बनाए रखने और पानी के बहाव से होने वाले मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है। जब वर्षा जल धीरे-धीरे जमीन में समाहित होगा, तो आसपास के भूजल स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना रहेगी। इससे कुओं और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों को भी लाभ मिल सकता है। गर्मियों में पानी की कमी का सामना करने वाले करीब 250 परिवारों के लिए यह व्यवस्था भविष्य में जल उपलब्धता बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव वर्षा की मात्रा, मिट्टी की स्थिति और स्थानीय भूजल परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिर भी वर्षा जल को बहकर निकलने से रोकना जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
निर्माण कार्य से अब तक 3166 मानव दिवस रोजगार का सृजन
डोंगरी टोला की इस पहल में जल संरक्षण के साथ स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया गया है। कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य के दौरान प्रतिदिन लगभग 150 से 160 श्रमिकों को काम मिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कार्य के माध्यम से अब तक कुल 3166 मानव दिवस रोजगार का सृजन हो चुका है।
स्थानीय स्तर पर काम मिलने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका का सहारा मिला है। मानव दिवस रोजगार की गणना में प्रत्येक व्यक्ति के एक दिन के काम को एक मानव दिवस माना जाता है। इस प्रकार निर्माण कार्य से जुड़े रोजगार का आंकड़ा श्रमिकों की कुल कार्य भागीदारी को दर्शाता है।
इस पहल से स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। इससे पर्यावरणीय जरूरतों और स्थानीय आजीविका के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है।
भूजल पुनर्भरण से हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा सहारा
कंटूर ट्रेंच में वर्षा जल को रोकने और जमीन में समाहित होने का अवसर मिलने से आसपास की मिट्टी में नमी बनी रह सकती है। इससे पेड़-पौधों और स्थानीय वनस्पतियों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने की उम्मीद है। इसके अलावा तेज बारिश के दौरान पानी की गति कम होने से मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने में भी सहायता मिल सकती है।
भूमि में नमी बनाए रखने से कृषि और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए भी लाभ की संभावना है। इस तरह जल संरक्षण की यह व्यवस्था केवल पानी जमा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि की गुणवत्ता, वनस्पति और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ी हुई है।
जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का साझा प्रयास
ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में विकसित की गई ये संरचनाएं वर्षा जल के सुनियोजित प्रबंधन की दिशा में एक स्थानीय पहल हैं। यहां जल संग्रहण की क्षमता, भूजल पुनर्भरण और रोजगार सृजन को एक साथ महत्व दिया गया है। आने वाले समय में इन संरचनाओं का प्रभाव वर्षा और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर सामने आएगा।
निष्कर्ष
डोंगरी टोला में लगभग 3 हजार स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच के निर्माण से 24 लाख 30 हजार लीटर वर्षा जल संग्रहण की क्षमता विकसित हुई है। इससे करीब 250 ग्रामीण परिवारों के लिए जल सुरक्षा की उम्मीद बढ़ी है, जबकि निर्माण कार्य के माध्यम से 3166 मानव दिवस रोजगार भी सृजित हुए हैं। यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को साथ लेकर चलने का उदाहरण है।
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