राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का रायपुर में स्वागत, राज्यपाल रमेन डेका और CM विष्णु देव साय ने की अगवानी
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद विमानतल में उनका स्वागत किया गया। इस दौरान राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति की अगवानी की। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर राज्य के प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति में स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के समस्त नागरिकों की ओर से राष्ट्रपति का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ को प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा बताते हुए राष्ट्रपति के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति की प्रस्तावित सहभागिता को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यात्रा के दौरान ऐतिहासिक बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में उनकी सहभागिता प्रमुख विषयों में शामिल है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन आयोजनों में राष्ट्रपति की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को पहचान मिलेगी।
स्वामी विवेकानंद विमानतल पर राष्ट्रपति का स्वागत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के रायपुर पहुंचने पर स्वामी विवेकानंद विमानतल में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति के आगमन के दौरान राज्य के दोनों प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी रही। यह औपचारिक स्वागत उनके छत्तीसगढ़ दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
राष्ट्रपति के आगमन की जानकारी के साथ ही बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में उनकी सहभागिता भी चर्चा में है। ये आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण अवसर हैं। राष्ट्रपति की यात्रा के संदर्भ में इन आयोजनों का विशेष महत्व बताया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया अभिनंदन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें छत्तीसगढ़ की धरती पर अभिनंदन किया। उन्होंने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ को प्रभु श्रीराम का ननिहाल तथा माता कौशल्या की पावन धरा बताया।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राष्ट्रपति के आगमन को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके स्वागत संदेश में छत्तीसगढ़ की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय समाज की पहचान को प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री की ओर से व्यक्त की गई ये बातें राष्ट्रपति की यात्रा के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती हैं।
बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में होगी सहभागिता
मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ऐतिहासिक बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में सहभागिता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है। बस्तर दशहरा राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है, जबकि मुरिया दरबार जनजातीय समाज की परंपराओं और सामुदायिक संवाद से संबंधित महत्वपूर्ण अवसर है।
राष्ट्रपति की इन आयोजनों में भागीदारी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का मान बढ़ेगा। इन आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सामने रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रमों के विस्तृत समय और अन्य गतिविधियों का उल्लेख नहीं किया गया है।
जनजातीय संस्कृति और परंपराओं पर रहेगा विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति की उपस्थिति को छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। राज्य की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक आयोजनों और परंपरागत व्यवस्थाओं को इस यात्रा के संदर्भ में प्रमुखता दी गई है।
बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार जैसे आयोजनों के साथ राष्ट्रपति की सहभागिता राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति से विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई ऊर्जा मिलेगी। यह मुख्यमंत्री का वक्तव्य है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति की यात्रा को राज्य के विकास संबंधी संकल्प से जोड़ा है।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रदेश में महत्वपूर्ण अवसर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के रायपुर आगमन पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की ओर से अभिनंदन करते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का उल्लेख किया। साथ ही, बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में राष्ट्रपति की सहभागिता को राज्य की जनजातीय परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।
निष्कर्ष:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ आगमन और बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में उनकी सहभागिता राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरव का अवसर बताते हुए जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।
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