सूरज की रोशनी से बदल रही सुकमा की तस्वीर, खेतों की सिंचाई से लेकर गांवों की गलियों तक पहुंची सौर ऊर्जा
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दूरस्थ इलाकों में सौर ऊर्जा अब विकास की नई राह तैयार कर रही है। बिजली और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों में सोलर तकनीक के इस्तेमाल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी, पेयजल और सिंचाई जैसी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
सोलर पम्प से किसानों को सिंचाई में सहारा
कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। सौर सुजला योजना के तहत जिले में अब तक करीब 4,300 सोलर पम्प किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित 200 सोलर पम्पों का लक्ष्य भी पूरा किया गया। इन पम्पों के जरिए किसान उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग कर खेतों तक पानी पहुंचा पा रहे हैं, जिससे सिंचाई कार्य को समय पर पूरा करने में सुविधा मिल रही है।
दूरस्थ गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट से रोशनी
सुकमा में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है। वहीं पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र लगाने की स्वीकृति दी गई है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार का काम भी जारी है।
रोशनी, पानी और सिंचाई—तीनों में सौर ऊर्जा की भूमिका
सोलर हाईमास्ट, सोलर पम्प और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं से ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों में सहूलियत मिल रही है। जिले में 71 सोलर हाईमास्ट, 672 सोलर पम्प तथा सौर सुजला योजना के तहत 4,300 सोलर पम्प सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाते हैं।
सौर ऊर्जा के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय स्तर पर सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मदद मिल रही है। सुकमा में यह पहल गांवों की गलियों को रोशन करने के साथ-साथ घरों तक पेयजल और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में भी उपयोगी साबित हो रही है।
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