DUSU रिजल्ट के बाद सौरव दास का विपक्ष पर निशाना, बोले- बिखरे वोटों का मिला फायदा
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद छात्र राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव में ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के खाते में गया। नतीजों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठाए।
सौरव दास ने चुनाव नतीजों पर क्या कहा?
सौरव दास ने दावा किया कि छात्रों के बीच मौजूदा व्यवस्था के विरोध में वोट बंटा हुआ था और अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच मतों के विभाजन का लाभ ABVP को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों को इसे सभी छात्रों के बहुमत का समर्थन नहीं मानना चाहिए। यह उनका चुनाव परिणामों पर राजनीतिक आकलन था।
कांग्रेस को संगठन मजबूत करने की सलाह
दास ने कांग्रेस और उसके छात्र संगठन को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि CJP पर आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत का भी उल्लेख किया, जो पहले NSUI से जुड़े रहे थे।
विपक्षी एकता पर भी उठे सवाल
CJP नेता ने विपक्षी छात्र संगठनों के बीच वैचारिक मतभेदों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अलग-अलग संगठनों की प्राथमिकताएं और रणनीतियां व्यापक एकजुटता को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने इसे विपक्षी राजनीति के लिए एक चुनौती के तौर पर पेश किया।
DUSU में किसे मिली जीत?
DUSU चुनाव में ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों से हराया।
चुनाव परिणामों के बाद अब छात्र संगठनों के बीच आगे की रणनीति और संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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