81 साल की सोनकुंवर को मिली राहत, बेटे के नाम जमीन का दानपत्र सिर्फ 500 रुपये में
महासमुंद। उम्र बढ़ने के साथ सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना बुजुर्गों के लिए परेशानी भरा हो सकता है। ऐसे में आसान पंजीयन प्रक्रिया और कम शुल्क की सुविधा बड़ी राहत देती है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी की 81 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर को भी पारिवारिक जमीन अपने बेटे श्री रवि राम पाल के नाम करने में ऐसी ही सुविधा मिली। दानपत्र के पंजीयन पर केवल 500 रुपये शुल्क लगने से परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से बातचीत में सोनकुंवर ने बताया कि संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा आसान रही। कम शुल्क के साथ प्रक्रिया में मिली सुविधा ने उनके लिए अनावश्यक दौड़भाग को भी कम किया।
राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारे के दस्तावेजों के पंजीयन शुल्क में राहत दी गई है। पहले जहां संपत्ति मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत शुल्क लिया जाता था, वहीं अब इन मामलों में पंजीयन शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है। सोनकुंवर के परिवार को भी इसी प्रावधान का लाभ मिला।
पंजीयन विभाग की ओर से ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी तकनीकी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोमेशन से जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग से आवेदन और कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सके।
सोनकुंवर और उनके पुत्र ने कम शुल्क और सरल पंजीयन व्यवस्था के लिए शासन एवं विभाग के प्रति आभार जताया। उनकी कहानी बताती है कि सरल प्रशासनिक प्रक्रियाएं और शुल्क में राहत सीधे तौर पर आम नागरिकों के समय, मेहनत और खर्च को कम कर सकती हैं।
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