आंगनबाड़ी की जांच से अस्पताल की सर्जरी तक, चिरायु योजना ने बचाई मासूम की जिंदगी

19 Sep 2026 - 18:17
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आंगनबाड़ी की जांच से अस्पताल की सर्जरी तक, चिरायु योजना ने बचाई मासूम की जिंदगी

रायपुर। समय पर हुई स्वास्थ्य जांच और त्वरित उपचार ने धमतरी के नन्हे भाव्यांश साहू को नई जिंदगी दी है। जन्मजात हृदयरोग से जूझ रहे भाव्यांश की बीमारी की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत संचालित चिरायु योजना की टीम ने समय रहते कर ली। इसके बाद विशेषज्ञ उपचार और सफल सर्जरी के जरिए बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट चुका है।

फरवरी 2026 में शहरी चिरायु टीम धमतरी द्वारा जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही थी। इसी दौरान चिकित्सकों ने भाव्यांश में जन्मजात हृदयरोग के संकेत पहचाने। टीम ने तत्काल आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे उच्च स्तरीय उपचार के लिए श्री सत्य साईं अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया। इस दौरान परिजनों को उपचार संबंधी जानकारी और आवश्यक सहयोग भी दिया गया।

अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच के बाद भाव्यांश की सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। 31 अगस्त को उसे अस्पताल में भर्ती किया गया और 2 सितंबर 2026 को कार्डियक सर्जनों की टीम ने उसकी सफल हृदय सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों की निगरानी और उचित देखभाल से उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। 9 सितंबर को स्वस्थ अवस्था में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

समय पर पहचान बनी इलाज की सबसे बड़ी कड़ी

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकृतियों, गंभीर बीमारियों और पोषण संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। भाव्यांश की कहानी में आंगनबाड़ी केंद्र पर हुई शुरुआती जांच से लेकर विशेषज्ञ अस्पताल में सफल सर्जरी तक स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय दिखाई देता है।

आज भाव्यांश स्वस्थ है और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार ने उसके परिवार को बड़ी राहत दी है। यह मामला बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के समय पर उपयोग के महत्व को भी सामने लाता है।

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