जशपुर में मैनी एनीकट निर्माण को मिली 70.99 करोड़ की मंजूरी, 1500 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का होगा विस्तार

05 Oct 2026 - 16:42
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जशपुर में मैनी एनीकट निर्माण को मिली 70.99 करोड़ की मंजूरी, 1500 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का होगा विस्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के विकास और किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जल संसाधन विभाग ने जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड में मैनी एनीकट के निर्माण कार्य के लिए 70 करोड़ 99 लाख 57 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ कृषि के लिए आवश्यक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।

मैनी एनीकट के निर्माण से जशपुर जिले के किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल संसाधन उपलब्ध होने की उम्मीद है। परियोजना के तहत कुल 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसमें खरीफ फसल के लिए 1300 हेक्टेयर और रबी फसल के लिए 200 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इससे अलग-अलग कृषि मौसम में किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

परियोजना का प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। एनीकट के निर्माण से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय नागरिकों के लिए निस्तारी और पेयजल से जुड़ी समस्या के समाधान में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा, एनीकट बनने के बाद क्षेत्र में आवागमन की सुविधा भी सुगम होने की बात कही गई है।

मैनी एनीकट के निर्माण के लिए मिली प्रशासकीय स्वीकृति

जल संसाधन विभाग द्वारा कांसाबेल विकासखंड के अंतर्गत मैनी एनीकट के निर्माण कार्य के लिए 70 करोड़ 99 लाख 57 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। यह राशि परियोजना के निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत की गई है। एनीकट का निर्माण ग्रामीण क्षेत्र में जल संसाधनों के विकास से जुड़ी परियोजना के रूप में किया जाएगा।

इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर रहेगा। एनीकट के निर्माण से जल को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता से जुड़े विभिन्न उपयोगों को सहारा मिल सकेगा।

1500 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेगी सिंचाई सुविधा

मैनी एनीकट परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण लाभ कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। परियोजना के पूरा होने के बाद कुल 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसमें खरीफ फसल के लिए 1300 हेक्टेयर तथा रबी फसल के लिए 200 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के दायरे में रखा गया है।

खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को कृषि कार्यों में पानी की जरूरत पूरी करने में सहायता मिलेगी। सिंचाई क्षेत्र के विस्तार से खेती के लिए जल संसाधन का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

भू-जल स्तर और जल संरक्षण पर रहेगा असर

एनीकट निर्माण का एक प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। परियोजना के निर्माण से पानी को स्थानीय स्तर पर संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों की उपलब्धता का कृषि के साथ-साथ दैनिक जरूरतों से भी सीधा संबंध होता है। ऐसे में मैनी एनीकट परियोजना से जल संरक्षण और स्थानीय जल उपलब्धता को मजबूती मिलने की संभावना है।

किसानों की आय और कृषि उत्पादन को मिलेगा आधार

1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से परियोजना का सीधा संबंध कृषि गतिविधियों से है। खरीफ के 1300 हेक्टेयर और रबी के 200 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों को दोनों कृषि मौसमों में पानी की उपलब्धता का लाभ मिल सकेगा।

परियोजना से क्षेत्र के किसानों की आय में वृद्धि होने और कृषि उत्पादन को नया संबल मिलने की बात कही गई है। सिंचाई सुविधा का विस्तार कृषि क्षेत्र में जल की उपलब्धता को बेहतर बनाने में सहायक होगा।

निस्तारी-पेयजल और आवागमन में भी सुविधा

मैनी एनीकट परियोजना से स्थानीय नागरिकों को निस्तारी और पेयजल से जुड़ी समस्या के स्थायी समाधान में भी मदद मिलने की उम्मीद है। जल संरक्षण के कारण क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को बेहतर आधार मिल सकेगा, जिसका उपयोग स्थानीय जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

इसके अलावा, एनीकट के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा भी सुगम होने की बात कही गई है। इस तरह परियोजना का लाभ कृषि और जल संरक्षण के साथ स्थानीय नागरिकों की आवश्यकताओं से भी जुड़ा होगा।

निष्कर्ष

जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड में मैनी एनीकट निर्माण के लिए 70 करोड़ 99 लाख 57 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। परियोजना के तहत 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिसमें 1300 हेक्टेयर खरीफ और 200 हेक्टेयर रबी क्षेत्र शामिल है। इसके साथ ही भू-जल स्तर में सुधार, जल संरक्षण, निस्तारी-पेयजल सुविधा और आवागमन को बेहतर बनाने में भी परियोजना की भूमिका रहने की उम्मीद है।

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