ट्रंप ने बनाई ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’, AI में अमेरिकी बढ़त बनाए रखने की जिम्मेदारी जय क्लेटन को

05 Oct 2026 - 11:14
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ट्रंप ने बनाई ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’, AI में अमेरिकी बढ़त बनाए रखने की जिम्मेदारी जय क्लेटन को

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अगली पीढ़ी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक में अमेरिका का दबदबा बनाए रखने के लिए रविवार को नई ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ (Super Intelligence Force) के गठन की घोषणा की। इस टास्क फोर्स की कमान अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जय क्लेटन (Jay Clayton) को सौंपी गई है। ट्रंप प्रशासन के इस कदम को तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक के बीच अमेरिकी रणनीति को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी संघीय दस्तावेजों और आधिकारिक संचार में ‘Artificial Intelligence’ की जगह ‘Super Intelligence’ शब्द के इस्तेमाल का निर्देश दिया था। व्हाइट हाउस के अनुसार, 29 सितंबर को जारी आदेश में कार्यकारी शाखा को आधिकारिक संचार, नीतिगत दस्तावेजों और अन्य गैर-कानूनी दस्तावेजों में ‘Super Intelligence’ और ‘SI’ शब्द इस्तेमाल करने को कहा गया है।

नई फोर्स का गठन ऐसे समय में हुआ है जब AI के तेजी से विस्तार को लेकर एक ओर तकनीकी क्षेत्र में निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा, साइबर जोखिम, रोजगार और तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता भी सामने आ रही है। ट्रंप प्रशासन AI के विकास को धीमा करने वाले कड़े नियमों के बजाय अमेरिकी तकनीकी बढ़त को बनाए रखने पर जोर देता रहा है।

क्या करेगी अमेरिका की ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’?

डोनल्ड ट्रंप के अनुसार, नई टास्क फोर्स का मुख्य काम संघीय सरकार के अलग-अलग AI प्रयासों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका सुपर इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व बनाए रखे। टास्क फोर्स सरकार और AI क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संपर्क और समन्वय का काम भी करेगी।

ट्रंप ने कहा है कि इस प्रयास में उपभोक्ताओं, सार्वजनिक हित से जुड़े समूहों, धार्मिक संगठनों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और AI कंपनियों जैसे अलग-अलग पक्षों से संपर्क किया जाएगा। टास्क फोर्स सीधे राष्ट्रपति ट्रंप और उनके चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स को रिपोर्ट करेगी।

ट्रंप ने इससे पहले सितंबर में AI को लेकर एक अलग फोर्स बनाने की बात कही थी। उस समय उन्होंने प्रस्तावित व्यवस्था की तुलना अपने पहले कार्यकाल में बनाई गई Space Force से की थी। उनका कहना था कि AI क्षेत्र में संघीय सरकार के प्रयासों को एक साथ लाने के लिए एक प्रमुख अधिकारी की जरूरत है।

व्हाइट हाउस की बैठक के बाद लिया गया फैसला

सुपर इंटेलिजेंस फोर्स की घोषणा से कुछ दिन पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में AI क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में AI के तेजी से हो रहे विकास और उससे जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई थी।

बैठक के बाद ट्रंप ने बताया था कि प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने एक स्वैच्छिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत कंपनियां AI तकनीक के विकास से जुड़े जोखिमों और नियंत्रण को लेकर अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाने पर सहमत हुई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते में कंपनियों की ओर से आंतरिक नियंत्रण और बाहरी ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को लेकर प्रतिबद्धताएं शामिल थीं। 

इसके बाद सुपर इंटेलिजेंस फोर्स का गठन AI को लेकर अमेरिकी सरकार और निजी तकनीकी क्षेत्र के बीच समन्वय को आगे बढ़ाने की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।

कौन हैं राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जय क्लेटन?

जय क्लेटन लंबे समय तक वॉल स्ट्रीट के वकील रहे हैं। 2008 के वित्तीय संकट के दौरान उन्होंने बार्कलेज का प्रतिनिधित्व किया था। इस दौरान बार्कलेज द्वारा गोल्डमैन सैक्स और लेहमैन ब्रदर्स की संपत्तियों की खरीद से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका रही थी।

ट्रंप के पहले कार्यकाल में क्लेटन अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के अध्यक्ष रहे। वर्ष 2017 से 2020 तक SEC के नेतृत्व के दौरान उनका रुख कई मामलों में कारोबारी हितों के पक्ष में माना गया। हालांकि, उनके कार्यकाल में उभरते क्रिप्टो उद्योग से जुड़े कई मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई भी हुई थी।

बाद में क्रिप्टो क्षेत्र से जुड़े कई कारोबारी और उद्यमी ट्रंप के प्रमुख समर्थकों में शामिल हुए। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में क्लेटन को मैनहट्टन में संघीय अभियोजकों का नेतृत्व करने के लिए चुना था। इसके बाद जुलाई में अमेरिकी सीनेट ने उन्हें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के पद पर नियुक्त किए जाने की पुष्टि की। 

हालांकि, क्लेटन की पेशेवर पृष्ठभूमि मुख्य रूप से कानून, वित्तीय नियमन और सरकारी भूमिकाओं से जुड़ी रही है। उनके पास तकनीकी या AI क्षेत्र में विशेषज्ञता की पृष्ठभूमि नहीं है। यही वजह है कि नई जिम्मेदारी उनके लिए एक अलग तरह की भूमिका मानी जा रही है।

AI के बढ़ते खतरे के बीच नई जिम्मेदारी

जय क्लेटन को सुपर इंटेलिजेंस फोर्स की जिम्मेदारी ऐसे समय में दी गई है जब AI के संभावित खतरों को लेकर शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है। AI सिस्टम के गलत तरीके से काम करने, सुरक्षा कमजोरियों और बाहरी सिस्टम में अनधिकृत पहुंच जैसे संभावित जोखिमों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।

AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि इसके विकास और इस्तेमाल के लिए सरकार की भूमिका कितनी होनी चाहिए। नई टास्क फोर्स के सामने एक तरफ तकनीकी प्रगति और अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ AI से जुड़े संभावित जोखिमों पर निगरानी का सवाल भी है। 

ट्रंप AI पर कड़े सरकारी नियमन के पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि अत्यधिक नियम अमेरिकी AI उद्योग की गति को प्रभावित कर सकते हैं और इससे चीन की कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक फायदा मिल सकता है। उनका यह भी कहना रहा है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वालों से निपटने के लिए मौजूदा संघीय कानून प्रवर्तन व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

AI को लेकर अमेरिका में बढ़ रही चिंता

AI के तेजी से विस्तार को लेकर अमेरिका में आम लोगों और कानून बनाने वालों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं। खासतौर पर रोजगार पर इसके संभावित असर को लेकर चर्चा तेज है। आशंका जताई जा रही है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से कई तरह के पारंपरिक काम प्रभावित हो सकते हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा AI के गलत इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा और समाज पर इसके व्यापक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे माहौल में अमेरिकी सरकार के सामने तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने और संभावित जोखिमों से निपटने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

निष्कर्ष

अमेरिका की नई ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ AI से जुड़े संघीय प्रयासों को एक दिशा में लाने की कोशिश है। जय क्लेटन को इसकी जिम्मेदारी देकर ट्रंप प्रशासन ने AI को तकनीकी विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी सामने रखा है। आने वाले समय में इस फोर्स की भूमिका यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि अमेरिका AI क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाए रखते हुए इससे जुड़े जोखिमों और सार्वजनिक चिंताओं से किस तरह निपटता है।

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