‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान, छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को मिली राष्ट्रीय पहचान

23 Sep 2026 - 16:22
Updated: 2 days ago
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‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान, छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को मिली राष्ट्रीय पहचान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिला है। वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित पुरस्कारों में फिल्म को यह राष्ट्रीय सम्मान दिया गया। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, ‘राम-नामी’ हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री चुनी गई है। फिल्म के निर्माता BBP Studio Virtual Bharat Pvt. Ltd. और निर्देशक भरतबाला गणपति हैं। 

इस उपलब्धि पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने निर्देशक भरतबाला गणपति सहित फिल्म के निर्माता और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने का अवसर है।

रामनामी समुदाय की परंपरा को मिली पहचान

रामनामी समुदाय छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा एक विशिष्ट समुदाय है। इसकी आस्था, जीवनशैली और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता का हिस्सा हैं।

‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला सम्मान इस विषय को देशभर में चर्चा के केंद्र में लाने वाला अवसर माना जा रहा है।

संस्कृति मंत्री ने फिल्म टीम को दी बधाई

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशील तरीके से सिनेमाई माध्यम के जरिए राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने फिल्म से जुड़े कलाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों, निर्माता और अन्य सहयोगियों को भी इस सम्मान का सहभागी बताया। उनके अनुसार, पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों से रामनामी समुदाय की सांस्कृतिक परंपरा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया गया है।

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का व्यापक स्वरूप

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में लोकगीत, लोकनृत्य, लोककलाएं, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराएं शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विविध रूप देती हैं।

‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार इसी व्यापक सांस्कृतिक विरासत के एक हिस्से को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाता है। इससे प्रदेश की लोक परंपराओं पर आधारित रचनात्मक कार्यों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘राम-नामी’ का सम्मान

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को Best Documentary श्रेणी में सम्मानित किया गया है। आधिकारिक पुरस्कार सूची में फिल्म के निर्माता के रूप में BBP Studio Virtual Bharat Pvt. Ltd. और निर्देशक के रूप में Bharatbala Ganapathy का नाम दर्ज है। इस श्रेणी में फिल्म को रजत कमल और 2 लाख रुपये का पुरस्कार निर्धारित है। 

यह पुरस्कार वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का हिस्सा है। पुरस्कारों में फीचर फिल्म, नॉन-फीचर फिल्म और सिनेमा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों को सम्मानित किया गया है। 

लोक विरासत को रचनात्मक माध्यम से आगे बढ़ाने का संदेश

संस्कृति मंत्री ने कहा कि राज्य की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी स्थानीय परंपराओं और विरासत को रचनात्मक माध्यमों के जरिए सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा।

निष्कर्ष

‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिलना रामनामी समुदाय की परंपरा पर आधारित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहचान है। फिल्म के जरिए छत्तीसगढ़ की एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को देश के व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिला है।

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