वर्धा में बिजली चोरों पर महावितरण का शिकंजा, 15 दिन में 111 मामले उजागर
वर्धा जिले में बिजली चोरी के खिलाफ महावितरण का विशेष जांच अभियान लगातार तेज हो रहा है। 1 से 15 सितंबर तक चलाए गए अभियान में अधिकारियों ने जिले के अलग-अलग इलाकों में बिजली कनेक्शनों और मीटरों की जांच की। महज 15 दिनों में बिजली चोरी के 111 मामले सामने आए हैं।
जांच के दौरान बिजली चोरी के कई तरीके उजागर हुए। कहीं मुख्य लाइन पर हुक डालकर बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था, तो कहीं मीटर को बायपास करने और सील से छेड़छाड़ के मामले मिले। कुछ मामलों में मीटर की गति धीमी करने और डिजिटल डिस्प्ले को प्रभावित करने जैसी अनियमितताएं भी सामने आईं।
हिंगनघाट में सबसे ज्यादा मामले
महावितरण ने वर्धा जिले के तीन विभागों में जांच की। इनमें वर्धा विभाग में 38, आर्वी में 33 और हिंगनघाट विभाग में 40 बिजली चोरी के मामले पकड़े गए। अभियान के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी जांच की गई।
जांच में घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा कुछ दुकानों और छोटे उद्योगों में भी अनधिकृत तरीके से बिजली का इस्तेमाल सामने आया। पकड़े गए मामलों में चोरी की गई बिजली की मात्रा का आकलन कर नियमानुसार दंडात्मक बिल तैयार किए जा रहे हैं।
FIR से लेकर कनेक्शन काटने तक कार्रवाई
महावितरण ने बिजली चोरी के मामलों में विद्युत अधिनियम, 2003 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। दंडात्मक राशि जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की जा रही है। वहीं, कुछ मामलों में बिजली आपूर्ति भी काट दी गई है।
हिंगनघाट विभाग में स्वीकृत उपयोग के बजाय दूसरे उद्देश्य के लिए बिजली इस्तेमाल करने का मामला भी सामने आया, जिसमें धारा 126 के तहत कार्रवाई की गई।
बिजली चोरी से बढ़ सकता है ट्रांसफार्मर पर दबाव
महावितरण के मुताबिक बिजली चोरी से केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि इससे ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त भार भी पड़ सकता है। इसके कारण तकनीकी खराबी और कम वोल्टेज जैसी समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है, जिसका असर नियमित रूप से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
महावितरण ने साफ किया है कि बिजली चोरी के खिलाफ जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने नागरिकों से अधिकृत कनेक्शन के जरिए ही बिजली का उपयोग करने और चोरी की जानकारी संबंधित विभाग को देने की अपील की है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखने की बात भी कही गई है।
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