रायपुर में बच्चों से मारपीट का मामला: बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने अस्पताल और बाल गृह पहुंचकर लिया जायजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडरी क्षेत्र में बच्चों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मेकाहारा अस्पताल और बाल गृह पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बच्चों के संरक्षण, मानसिक परामर्श और पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही, मामले में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मामले में तीन वर्षीय और आठ वर्षीय बालकों के साथ मारपीट किए जाने की सूचना मिली थी। घटना के बाद तीन वर्षीय बच्चे को गंभीर चोटें आने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दूसरे बालक को बाल गृह में सुरक्षित रखा गया है। वहीं, छह वर्षीय बालिका को उसकी सुरक्षा और देखभाल के लिए मातृछाया में रखा गया है। मामले में पुलिस ने बच्चों की माता और सौतेले पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
आयोग ने 15 अक्टूबर 2026 को प्रकरण का संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद अध्यक्ष ने संबंधित स्थानों का दौरा कर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान बच्चों की सुरक्षा, उपचार और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया गया।
चाइल्ड हेल्पलाइन से मिली थी घटना की सूचना
इस मामले की जानकारी 15 अक्टूबर 2026 को चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त हुई थी। सूचना मिलने के बाद बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों ने आवश्यक कदम उठाए। घटना में तीन वर्षीय और आठ वर्षीय बालकों के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई।
घटना में घायल तीन वर्षीय बच्चे को 16 अक्टूबर 2026 को मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, दूसरे बालक को बाल गृह में रखा गया है। छह वर्षीय बालिका को भी सुरक्षित देखभाल के लिए मातृछाया में पहुंचाया गया। बच्चों को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर रखने का उद्देश्य उनकी देखभाल और संरक्षण से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर जाना बच्चे का हाल
मामले का संज्ञान लेने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा मेकाहारा अस्पताल पहुंचीं। यहां उन्होंने उपचाररत तीन वर्षीय बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में जाना। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चे का स्वास्थ्य फिलहाल ठीक बताया गया है।
अस्पताल के दौरे के बाद अध्यक्ष बाल गृह भी पहुंचीं। वहां उन्होंने दूसरे बालक की सुरक्षा, देखभाल और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के साथ उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उनकी देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
बच्चों की काउंसलिंग और पुनर्वास पर विशेष ध्यान
मारपीट की घटना के बाद बच्चों को केवल शारीरिक उपचार ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों बालकों और बालिका की काउंसलिंग की जा रही है। इसके माध्यम से उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने और उनकी भावनात्मक स्थिति का ध्यान रखने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को बच्चों के संरक्षण, काउंसलिंग और पुनर्वास के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके साथ ही, मामले में लागू नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस ने माता और सौतेले पिता को किया गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बच्चों की माता और सौतेले पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बच्चों के साथ मारपीट की घटना सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी प्रकरण पर ध्यान केंद्रित किया।
आयोग ने 15 अक्टूबर को ही मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी थी। इस प्रकरण में बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखने, उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने और काउंसलिंग की व्यवस्था करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर उचित ध्यान दिया जा सके।
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर के प्रचार से मिल रही मदद
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा प्रदेश के विभिन्न थानों और संबंधित संस्थानों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित कराने की पहल की गई है। आयोग के अनुसार, इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके माध्यम से बच्चों के साथ हिंसा और प्रताड़ना से जुड़े मामलों की जानकारी समय पर मिल रही है, जिससे संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने में सहायता मिल रही है।
आयोग ने चाइल्ड हेल्पलाइन के अधिकारियों और कर्मचारियों की तत्परता तथा संवेदनशील कार्यप्रणाली की सराहना की है। समय पर सूचना मिलने से बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और उनकी आवश्यक देखभाल की व्यवस्था करने में मदद मिल सकती है। ऐसे मामलों में सूचना तंत्र की सक्रियता और संबंधित विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
रायपुर के पंडरी क्षेत्र में बच्चों के साथ मारपीट का यह मामला बाल सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण से जुड़ा गंभीर प्रकरण है। आयोग की अध्यक्ष ने अस्पताल और बाल गृह पहुंचकर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया तथा अधिकारियों को उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास से जुड़े निर्देश दिए। पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब बच्चों की सुरक्षित देखभाल और उनके सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है।
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