1200 रुपये से शुरू हुआ सफर, आज 117 पशुओं की डेयरी; राकेश ने बदली गांव की तस्वीर

17 Sep 2026 - 19:11
Updated: 8 days ago
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1200 रुपये से शुरू हुआ सफर, आज 117 पशुओं की डेयरी; राकेश ने बदली गांव की तस्वीर

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के ग्राम जुर्डा के राकेश पटेल की कहानी ग्रामीण आत्मनिर्भरता और मेहनत की मिसाल बनकर सामने आई है। कभी सिर्फ 1,200 रुपये की पूंजी से एक गाय के सहारे दूध बेचने का काम शुरू करने वाले राकेश पटेल आज 117 पशुओं के डेयरी फार्म का संचालन कर रहे हैं। उनकी इस पहल से अब केवल उनका परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास के कई किसान और ग्रामीण भी लाभान्वित हो रहे हैं।

साइकिल से दूध बेचने से हुई शुरुआत

राकेश पटेल ने अपने डेयरी कारोबार की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से की थी। एक गाय से करीब 4 लीटर दूध प्राप्त होता था, जिसे वे साइकिल से घर-घर पहुंचाकर बेचते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने काम जारी रखा और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके डेयरी कारोबार को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।

डेयरी विस्तार के लिए उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण मिला, जिसमें 2.50 लाख रुपये की सब्सिडी शामिल थी। इसके बाद डेयरी उद्यमिता योजना के तहत 12 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने 16 गायें खरीदीं। लगातार प्रयासों के बाद आज उनके फार्म में 117 पशु हैं।

42 किसान परिवारों से रोज 300 लीटर दूध का संग्रहण

राकेश पटेल ने अपने डेयरी व्यवसाय को केवल निजी कारोबार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आसपास के किसान परिवारों को भी इससे जोड़ा। वर्तमान में 42 किसान परिवारों से प्रतिदिन करीब 300 लीटर दूध का संग्रहण किया जाता है। इससे किसानों को दूध बेचने के लिए नियमित बाजार मिला है और उनकी आय का अतिरिक्त माध्यम तैयार हुआ है।

डेयरी में पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए कृत्रिम गर्भाधान, सॉर्टेड सीमेन, नियमित टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य सेवाओं का भी उपयोग किया जा रहा है। पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कर्मचारियों के मार्गदर्शन से डेयरी प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।

16 ग्रामीणों को मिला रोजगार

डेयरी का विस्तार होने के साथ गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान में 10 महिलाएं और 6 युवा सीधे डेयरी से जुड़े हुए हैं। यानी कुल 16 लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। इस तरह एक छोटे से डेयरी व्यवसाय ने ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार किए हैं।

डेयरी के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहल

राकेश पटेल की डेयरी की खास बात यह भी है कि यहां पशुपालन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है। आसपास के गांवों से किसानों का पैरा एकत्र कर उसे पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बदले किसानों को गोबर दिया जाता है, जिसका उपयोग जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। इससे फसल अवशेष जलाने की जरूरत कम करने के साथ ही डेयरी की चारे संबंधी लागत को भी कम करने में मदद मिलती है।

एक छोटे प्रयास से बना बड़ा ग्रामीण मॉडल

राकेश पटेल की कहानी दिखाती है कि सीमित पूंजी से शुरू किया गया व्यवसाय भी सही मार्गदर्शन, मेहनत और उपलब्ध योजनाओं के सहयोग से बड़े स्तर तक पहुंच सकता है। उनकी डेयरी आज दूध उत्पादन के साथ किसान परिवारों को बाजार, ग्रामीणों को रोजगार और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर उपलब्ध करा रही है।

सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई राकेश पटेल की यह कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा देने की तस्वीर प्रस्तुत करती है। 1,200 रुपये से शुरू हुआ उनका सफर आज 117 पशुओं के डेयरी फार्म तक पहुंच चुका है।

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