स्वसहायता समूह से ‘लखपति दीदी’ तक पहुंचीं सीता मरावी, मेहनत से बदली आर्थिक तस्वीर
ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में स्वसहायता समूहों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसी ही प्रेरक कहानी श्रीमती सीता मरावी की है, जिन्होंने समूह से जुड़कर आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन हासिल किया और स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ीं। अपनी मेहनत और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर आज वह न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी मिसाल बनी हैं।
सीता मरावी को महतारी वंदन योजना के तहत 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहारा मिल रहा है। वहीं, स्वसहायता समूह से जुड़ी आजीविका गतिविधियों और अपने परिश्रम के जरिए उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी पहचान बनाई है।
उनकी यह यात्रा स्वसहायता समूह से शुरू होकर स्वरोजगार और ‘लखपति दीदी’ बनने तक पहुंची। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ‘लखपति दीदी’ पहल और छत्तीसगढ़ में बिहान की गतिविधियों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सीता मरावी की कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को आजीविका का साधन बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं। अपनी सफलता के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार भी जताया।
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