MPSC Chairman Vivek Bhimanwar News: चेयरमैन के खिलाफ जांच समिति की सिफारिश, पुणे में छात्रों का प्रदर्शन जारी
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर पुणे में प्रतियोगी छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को पत्र लिखकर MPSC के मौजूदा चेयरमैन विवेक भीमनवार, पूर्व चेयरमैन और आयोग के सदस्यों के कामकाज की जांच के लिए समिति गठित करने का अनुरोध किया है। यह कदम संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया से जुड़ा है।
मुख्यमंत्री ने हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने की सिफारिश की है। सरकार की मांग है कि समिति अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपे, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सके। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई को तय मानना उचित नहीं होगा।
पुणे में चल रहे आंदोलन की प्रमुख वजहों में MPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियां और खास तौर पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर पद की परीक्षा से जुड़ा पेपर लीक विवाद शामिल है। MPSC ने इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था, लेकिन छात्रों की कई मांगें अभी भी बनी हुई हैं।
तीन महीने में रिपोर्ट देने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया है। प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को देने की सिफारिश की गई है। इसके जरिए मौजूदा चेयरमैन विवेक भीमनवार के साथ पूर्व चेयरमैन और आयोग के सदस्यों के कामकाज की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक जांच समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया तय की जाएगी। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत संवैधानिक पदों पर बैठे आयोग के पदाधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है।
ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक से शुरू हुआ विवाद
MPSC के ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती मामले में प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतों के बाद छात्रों की नाराजगी बढ़ी। यह भर्ती खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अंतर्गत आती है। जांच के बाद MPSC ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी थी। इसके बाद छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और आयोग की जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाए।
छात्रों का आंदोलन केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। प्रदर्शनकारी MPSC के चेयरमैन विवेक भीमनवार के इस्तीफे समेत आयोग की कार्यप्रणाली में बदलाव और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें रख रहे हैं। पुणे के अलावा राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हुए हैं।
सचिव के तबादले के बाद चेयरमैन पर बढ़ा दबाव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और MPSC प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच हाल में बैठक हुई थी। इस बातचीत के बाद आयोग के सचिव महेंद्र हरपालकर को उनके पद से हटाकर तबादला किया गया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी चेयरमैन विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग पर कायम रहे।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि MPSC के संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इसी संदर्भ में जांच समिति गठित करने की सिफारिश को आगे की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
शरद पवार ने फडणवीस से बातचीत की
MPSC छात्रों के आंदोलन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बातचीत की। उन्होंने छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं का जल्द समाधान निकालने की अपील की।
शरद पवार ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ती है और छात्र प्रतिनिधि इसके लिए तैयार होते हैं, तो वह गतिरोध खत्म करने और समाधान निकालने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। छात्रों के साथ बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की अपील उन्होंने मुख्यमंत्री से की।
रोहित पवार का अल्टीमेटम, राहुल गांधी के आने का दावा

पुणे में आंदोलन के दौरान विधायक रोहित पवार भी छात्रों के साथ खड़े हैं। उन्होंने राज्य सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर समाधान नहीं निकला तो पुणे में बड़ा आंदोलन हो सकता है। उनके मुताबिक, छात्र और उनके अभिभावक आगे की रणनीति तय करेंगे।
रोहित पवार ने दावा किया कि 7 या 8 अक्टूबर को राहुल गांधी के पुणे आने की संभावना है और उस दौरान करीब एक लाख छात्र सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने पुणे बंद या मुंबई स्थित मंत्रालय की ओर मार्च की संभावना भी जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि राज ठाकरे और आदित्य ठाकरे भी आंदोलन में पहुंच सकते हैं।
निष्कर्ष
MPSC को लेकर पुणे में जारी छात्रों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने आयोग के मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों के कामकाज की जांच के लिए समिति गठित करने की सिफारिश की है। अब प्रस्तावित जांच और तीन महीने में आने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की संवैधानिक कार्रवाई का रास्ता तय होगा। वहीं, छात्रों की मांगों और आंदोलन को लेकर राजनीतिक नेताओं की सक्रियता के कारण मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
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