Cyber Crime Alert: परिचित की फोटो देखकर भी न करें भरोसा, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश से बचने पुलिस ने दी सलाह

04 Oct 2026 - 16:10
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Cyber Crime Alert: परिचित की फोटो देखकर भी न करें भरोसा, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश से बचने पुलिस ने दी सलाह

छत्रपति संभाजीनगर में बढ़ते साइबर अपराध के बीच पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने नागरिकों को ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों को लेकर सतर्क किया है। साइबर अपराधी अब केवल अनजान नंबर या फर्जी पहचान के सहारे ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि परिचित लोगों की फोटो, नाम और पहचान का इस्तेमाल करके भी पैसे की मांग कर रहे हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए पुलिस ने नागरिकों को “ठहरें, सोचें और जांचें” का मंत्र अपनाने की सलाह दी है।

पुलिस आयुक्त ने कहा कि मोबाइल पर आने वाले किसी भी संदिग्ध संदेश, अनजान कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेनदेन से संबंधित सूचना पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। किसी व्यक्ति की तस्वीर और नाम देखकर उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना पैसे भेजना भी जोखिम भरा हो सकता है।

शहर में पिछले महीने ऐसे साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं, जिनमें परिचित व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल कर 50 लाख रुपये की ठगी की गई। वहीं, एक अन्य मामले में मैसेजिंग एप की प्रोफाइल तस्वीर का दुरुपयोग करके 3.70 करोड़ रुपये की ठगी हुई।

परिचित की फोटो से भेजे मैसेज पर भी करें पुष्टि

साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। अब ठग किसी परिचित व्यक्ति की फोटो को मैसेजिंग एप की प्रोफाइल तस्वीर के रूप में इस्तेमाल करके उसके नाम से संपर्क कर सकते हैं। इसके बाद अचानक आर्थिक जरूरत बताकर पैसे भेजने के लिए कहा जाता है।

पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने नागरिकों से अपील की है कि परिचित के नाम से पैसे मांगने वाला संदेश मिलने पर भी सीधे भरोसा न करें। संबंधित व्यक्ति के वास्तविक मोबाइल नंबर पर फोन करके जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। इसके अलावा किसी दूसरे विश्वसनीय माध्यम से भी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैसे की मांग वास्तव में उसी व्यक्ति ने की है।

पुलिस के अनुसार, केवल फोटो, नाम या प्रोफाइल देखकर किसी व्यक्ति की पहचान को सही मान लेना उचित नहीं है। आर्थिक लेनदेन से पहले जानकारी की जांच करना जरूरी है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर ठगी

साइबर अपराधियों द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भी लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है। ठग खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर नागरिकों से संपर्क करते हैं और किसी मामले में फंसने का भय पैदा करते हैं। इसके बाद कार्रवाई से बचने या अन्य बहाने बनाकर पैसे की मांग की जा सकती है।

पुलिस ने नागरिकों को ऐसे कॉल या संदेश मिलने पर घबराकर तत्काल पैसा भेजने से बचने की सलाह दी है। इसी तरह, किसी परिचित के नाम से अचानक आर्थिक सहायता मांगने पर भी जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए।

पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने नागरिकों को किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में ठहरने, सोचने और जांचने के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी है।

APK फाइल और अनजान लिंक से रहें सावधान

व्हाट्सऐप या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई अनजान APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचना चाहिए। इसी तरह किसी अनजान लिंक, QR कोड, फोन कॉल या संदेश को बिना जांचे खोलना भी जोखिम पैदा कर सकता है। किसी फाइल या लिंक पर कार्रवाई करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करना जरूरी है।

साइबर ठग फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन लोन एप, नकली शॉपिंग वेबसाइट और विवाह संबंधी वेबसाइटों के जरिए भी लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। शुरुआत में वे भरोसा कायम करते हैं और बाद में शुल्क, अग्रिम भुगतान या किसी अन्य कारण का हवाला देकर रकम मांग सकते हैं।

फर्जी निवेश में पहले लाभ दिखाकर बढ़ाते हैं भरोसा

ऑनलाइन निवेश और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली ठगी में भी एक खास तरीका अपनाया जाता है। पहले कम रकम निवेश कराई जाती है और उसके बदले लाभ दिखाकर व्यक्ति का भरोसा बढ़ाया जाता है। इसके बाद बड़ी रकम निवेश कराने के बाद जब पैसा निकालने की कोशिश की जाती है, तो टैक्स, शुल्क या अन्य कारण बताकर अतिरिक्त राशि मांगी जा सकती है।

इसी तरह बैंक खाता अपडेट करने, ऑनलाइन भुगतान सुविधा जारी रखने या खाता बंद होने से बचाने के नाम पर भी ठग OTP, PIN, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।

पुलिस ने सलाह दी है कि बैंक या वित्तीय संस्था के नाम से आने वाले किसी संदेश में दिए गए लिंक या फोन नंबर पर सीधे भरोसा न करें। संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था के आधिकारिक माध्यम से ही जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत

पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने नागरिकों से OTP, PIN, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की है। ऑनलाइन लेनदेन से पहले सामने वाले व्यक्ति, लिंक या वेबसाइट की वास्तविकता की जांच करना जरूरी है।

यदि किसी नागरिक के साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो उसे बिना देरी किए 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को रोकने के लिए कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की सलाह का मुख्य संदेश यही है कि ऑनलाइन दुनिया में केवल किसी परिचित का नाम, फोटो या प्रोफाइल देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, नकली कस्टमर केयर, APK फाइल और संदिग्ध लिंक जैसे तरीकों से बचने के लिए किसी भी आर्थिक लेनदेन से पहले सत्यापन जरूरी है। “ठहरें, सोचें और जांचें” की सावधानी अपनाकर नागरिक साइबर ठगी के जोखिम को कम कर सकते हैं।

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