अमरावती की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, तीरंदाजी में जीता स्वर्ण पदक

03 Oct 2026 - 10:19
Updated: 24 days ago
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अमरावती की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, तीरंदाजी में जीता स्वर्ण पदक

साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची कुमकुम

महाराष्ट्र के अमरावती की 17 वर्षीय तीरंदाज कुमकुम अनिल मोहोड ने 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता है। जापान में आयोजित प्रतियोगिता में कुमकुम ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण अपने नाम किया और इस उपलब्धि के साथ एशियाई खेलों में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की ओ येजिन को शूट-ऑफ में हराया।

कुमकुम की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनका परिवार सामान्य आर्थिक परिस्थितियों से गुजरता है। उनके पिता अनिल मोहोड घर पर मिठाई के डिब्बे बनाने का काम करते हैं, जबकि मां रूपाली गृहिणी हैं। परिवार की सीमित परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता ने बेटी को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। मां की प्रेरणा से कुमकुम ने करीब छह साल पहले तीरंदाजी शुरू की और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई।

मां की प्रेरणा से शुरू हुआ तीरंदाजी का सफर

कुमकुम ने तीरंदाजी की शुरुआती ट्रेनिंग कोच प्रफुल्ल डांगे के मार्गदर्शन में हासिल की। वर्ष 2023 में अमरावती में खेलो इंडिया केंद्र शुरू होने के बाद उन्होंने वहां भी अभ्यास जारी रखा। इस दौरान उन्हें कोच गिरीश कुकडे का मार्गदर्शन मिला। लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं के अनुभव ने उनके खेल को आगे बढ़ाने में मदद की।

कुमकुम के कोच प्रफुल्ल डांगे ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि फाइनल मुकाबले में उन्होंने एक अनुभवी तीरंदाज की तरह प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, दबाव के महत्वपूर्ण क्षणों में कुमकुम ने पूरे अंक हासिल किए और अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने कहा कि कुमकुम की सफलता से अमरावती और देश का मान बढ़ा है।

पहले एशियन गेम्स में ही हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम

गोसावी कॉलोनी स्थित अपने साधारण घर से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने वाली कुमकुम ने अपने पहले ही सीनियर एशियाई खेलों में बड़ी उपलब्धि हासिल की। इससे पहले 2026 के सीनियर सीजन में उन्होंने शंघाई और अंताल्या में लगातार दो वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल भी जीते थे।

एशियन गेम्स में कुमकुम ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बनकर इतिहास रचा। अंकिता भक्त और कीर्ति शर्मा के साथ भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स स्वर्ण जीता।

परिवार की खुशी, पिता ने जताया गर्व

कुमकुम की ऐतिहासिक सफलता के बाद उनके घर में जश्न का माहौल है। पिता अनिल मोहोड ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में उसने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिस पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। बेटी की सफलता देखकर मां रूपाली की आंखों में भी खुशी के आंसू आ गए।

कुमकुम की कहानी में उनके परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। उनके पिता घर से ही मिठाई के डिब्बे बनाने का काम करते हैं और इसी साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर कुमकुम ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी जगह बनाई है।

5 अक्टूबर को अमरावती में होगा भव्य स्वागत

एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कुमकुम के अमरावती लौटने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। परिजनों के अनुसार, कुमकुम 5 अक्टूबर को अमरावती पहुंचेंगी। उनके स्वागत के लिए राजकमल चौक से डिविजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तक विशाल जुलूस निकालने की तैयारी है।

कुमकुम सुलोचना बेन कापडिया जूनियर कॉलेज की छात्रा हैं। उनकी सफलता पर गुजराती एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष सीए नीलेश लाठिया, कार्यकारिणी सदस्यों और मुख्याध्यापिका अंजली देव ने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कुमकुम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

संघर्ष से सफलता तक पहुंची अमरावती की तीरंदाज

कुमकुम मोहोड की उपलब्धि खेल प्रतिभा के साथ-साथ लंबे अभ्यास और पारिवारिक सहयोग की कहानी भी है। सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने जूनियर स्तर से सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक का सफर तय किया। 2026 एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण और टीम स्पर्धा में स्वर्ण के साथ उनका नाम भारतीय तीरंदाजी के महत्वपूर्ण युवा खिलाड़ियों में दर्ज हुआ है।

निष्कर्ष

अमरावती की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपने शहर और भारतीय तीरंदाजी को नई उपलब्धि दी है। परिवार और कोचों के मार्गदर्शन में शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है। 5 अक्टूबर को अमरावती में होने वाला स्वागत उनकी इस उपलब्धि के बाद शहर में उत्साह का अवसर बनेगा।

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