UPI Payment: UPI से पैसे भेजने पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, बड़े मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा नया MDR नियम
भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI लगातार बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। नए MDR फ्रेमवर्क को लेकर यूजर्स और कारोबारियों के बीच कई सवाल हैं, लेकिन ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि UPI से किसी व्यक्ति को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी फ्री
नए नियमों के अनुसार दुकानदार या किसी मर्चेंट को ₹2,000 तक का UPI भुगतान करने पर MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को भी P2PM श्रेणी के तहत जीरो MDR का लाभ मिलता रहेगा। इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स पर अतिरिक्त भुगतान लागत नहीं आएगी।
₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40% MDR
₹2,000 से अधिक के सामान्य P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.40% MDR लागू होगा। हालांकि बड़े लेनदेन के लिए इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
उदाहरण के तौर पर ₹3,000 के भुगतान पर MDR ₹12 और ₹5,000 के भुगतान पर ₹20 होगा। वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा के लेनदेन में भी MDR ₹300 से अधिक नहीं होगा।
ग्राहक से नहीं वसूला जा सकेगा MDR
MDR ग्राहक से लिया जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। यह मर्चेंट पेमेंट सिस्टम के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है। इसलिए सामान्य ग्राहक को UPI से भुगतान करते समय अलग से MDR या ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी होगी।
पेट्रोल, बीमा और जरूरी सेवाओं में अलग नियम
ईंधन, बीमा, रेलवे, टेलीकॉम और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर प्रतिशत आधारित MDR के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में भुगतान लागत को एक निश्चित स्तर पर रखना है।
छोटे कारोबारियों को राहत
नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों को विशेष राहत दी गई है। UPI QR के माध्यम से महीने में ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले P2PM श्रेणी के छोटे व्यापारी सभी लेनदेन पर जीरो MDR का लाभ लेते रहेंगे।
UPI पर MDR लाने की वजह क्या है?
सरकार के मुताबिक MDR व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता और उसके संचालन को मजबूत करना है। MDR से मिलने वाली राशि सरकार द्वारा टैक्स के रूप में नहीं ली जाती, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रतिभागियों के बीच वितरित होती है। इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप से जुड़े पक्ष शामिल हैं।
ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात
UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए नियमों का सबसे अहम हिस्सा यही है कि P2P ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेगा और ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा। नए शुल्क का असर मुख्य रूप से तय सीमा से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक लगभग 96% P2M ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
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