Maya Rajeshwaran Revathi: माया राजेश्वरन रेवती ने तोड़ा सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड, 17 साल की उम्र में जीता ITF W35 खिताब

12 Oct 2026 - 11:25
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Maya Rajeshwaran Revathi: माया राजेश्वरन रेवती ने तोड़ा सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड, 17 साल की उम्र में जीता ITF W35 खिताब

भारत की युवा टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। महज 17 साल 3 महीने की उम्र में माया ने पुर्तगाल के लागोस में आयोजित ITF W35 टेनिस टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया और यह खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गईं।

माया ने टूर्नामेंट के फाइनल में स्पेन की सीलिया सरविनो को सीधे सेटों में 6-4, 6-2 से हराकर ट्रॉफी अपने नाम की। इस जीत के साथ उन्होंने अपने करियर का पहला प्रोफेशनल खिताब हासिल किया। इससे पहले सानिया मिर्जा ने वर्ष 2004 में 17 साल 10 महीने की उम्र में लागोस में यह खिताब जीता था। माया ने उनसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करके भारतीय महिला टेनिस में अपनी पहचान मजबूत की है।

इस टूर्नामेंट में माया का सफर आसान नहीं रहा। विश्व रैंकिंग में 1038वें स्थान पर मौजूद इस युवा खिलाड़ी ने पहले ही दौर में टूर्नामेंट की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को हराकर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। इसके बाद लगातार जीत दर्ज करते हुए उन्होंने फाइनल तक का सफर तय किया और खिताबी मुकाबले में भी अपना संयम बनाए रखा।

17 साल की उम्र में सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड तोड़ा

माया राजेश्वरन रेवती की यह जीत भारतीय टेनिस के लिए इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जो करीब 22 वर्षों से सानिया मिर्जा के नाम था। सानिया ने 10 अक्टूबर 2004 को नाइजीरिया के लागोस में 17 साल 10 महीने की उम्र में यह खिताब जीता था। वहीं, माया ने 11 अक्टूबर 2026 को पुर्तगाल के लागोस में 17 साल 3 महीने की उम्र में ट्रॉफी जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया।

दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों में एक दिलचस्प समानता भी है। सानिया और माया, दोनों ने 17 साल की उम्र में लागोस में यह खिताब अपने नाम किया। हालांकि, दोनों टूर्नामेंट अलग-अलग देशों में आयोजित हुए थे। माया की जीत ने उन्हें सबसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारतीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।

फाइनल में सीलिया सरविनो को सीधे सेटों में हराया

खिताबी मुकाबले में माया का सामना स्पेन की सीलिया सरविनो से हुआ। माया ने शुरुआत से ही मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश की और पहला सेट 6-4 से जीत लिया। इसके बाद दूसरे सेट में उन्होंने अपना प्रदर्शन जारी रखा और 6-2 से सेट जीतकर मैच समाप्त कर दिया।

6-4, 6-2 की जीत के साथ माया ने बिना तीसरे सेट की जरूरत के खिताब अपने नाम किया। फाइनल में जीत हासिल करना उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह उनके करियर का पहला प्रोफेशनल खिताब था। युवा खिलाड़ी के रूप में इतने अहम मुकाबले में प्रदर्शन बनाए रखना उनके टूर्नामेंट अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

माया की इस जीत ने यह भी दिखाया कि वह दबाव वाले मुकाबलों में अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करती हैं। खिताबी मैच के दौरान मानसिक तनाव महसूस होने के बावजूद उन्होंने अपनी लय बनाए रखी और मुकाबले को सीधे सेटों में समाप्त किया।

पहले ही दौर में शीर्ष वरीय खिलाड़ी को हराकर किया उलटफेर

माया का टूर्नामेंट अभियान पहले दौर से ही चर्चा में आ गया था। विश्व रैंकिंग में 1038वें स्थान पर मौजूद माया के सामने शुरुआती मुकाबले में टूर्नामेंट की शीर्ष वरीय खिलाड़ी और विश्व नंबर 246 जुस्तिना मिकुलस्काइट थीं। माया ने उन्हें 7-6(1), 6-1 से हराकर बड़ा उलटफेर किया।

पहले सेट में माया एक समय 0-5 से पीछे चल रही थीं। ऐसी स्थिति में सेट गंवाने का खतरा था, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर बराबर किया और टाईब्रेकर में 7-1 से सेट जीत लिया। इसके बाद दूसरे सेट में उन्होंने 6-1 से जीत दर्ज करके अगले दौर में जगह बनाई।

दूसरे राउंड में माया ने अर्जेंटीना की बर्टा बोनार्डी को 6-2, 6-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला आठवीं वरीयता प्राप्त तियान जियालिन से हुआ, जहां माया ने 6-2, 6-1 से जीत दर्ज की। सेमीफाइनल में ब्रिटेन की ब्रिट डु प्री के खिलाफ उन्हें वॉकओवर मिला, जिसके बाद उन्होंने फाइनल में प्रवेश किया।

मानसिक दबाव कम करने के लिए मन ही मन गुनगुनाया गाना

फाइनल में पहला सेट जीतने के बाद माया को अपना पहला प्रोफेशनल खिताब हासिल करने की उम्मीद के साथ दबाव भी महसूस हो रहा था। ऐसे समय में उन्होंने मानसिक तनाव को संभालने के लिए एक साधारण तरीका अपनाया। माया ने सुबह सुने हुए एक गाने को मन ही मन गुनगुनाना शुरू कर दिया।

इससे उन्हें मैच के दबाव से ध्यान हटाने और अपने खेल पर दोबारा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। टेनिस जैसे प्रतिस्पर्धी खेल में शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक एकाग्रता भी अहम होती है। माया ने फाइनल के दौरान अपने अनुभव के बारे में बताते हुए इस तरीके का उल्लेख किया।

खिताब जीतने के बाद माया ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहला खिताब हमेशा खास होता है और इस जीत से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उनके मुताबिक, इस सफलता ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि वह आगे बड़े स्तर पर भी मुकाबला कर सकती हैं।

भारतीय महिला टेनिस के लिए अहम उपलब्धि

माया राजेश्वरन रेवती की ITF W35 खिताबी जीत उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने टूर्नामेंट में शीर्ष वरीय खिलाड़ी को हराने से लेकर फाइनल में सीधे सेटों में जीत दर्ज करने तक लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। सानिया मिर्जा का पुराना रिकॉर्ड तोड़ना इस उपलब्धि को और खास बनाता है।

निष्कर्ष

माया राजेश्वरन रेवती ने 17 साल 3 महीने की उम्र में ITF W35 महिला एकल खिताब जीतकर भारतीय टेनिस में नया रिकॉर्ड बनाया है। कठिन शुरुआत के बाद वापसी, लगातार जीत और फाइनल में मानसिक दबाव को संभालने की उनकी क्षमता इस टूर्नामेंट की प्रमुख बातें रहीं। अब यह जीत माया के आत्मविश्वास और आगामी टेनिस करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

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